rakesh shankar bharti
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पुस्तक-समीक्षा
जिनका अंजुमन कभी गुलज़ार न हो सका ‘इस जिन्दगी के उस पार’ की कहानियाँ
किन्नर विमर्श पर अभी तक केवल दो आत्मकथाएं पढ़ी थीं। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की ‘मैं हिजड़ा मैं लक्ष्मी’ और मानोबी बंधोपाध्याय की ‘पुरुष तन में फंसा मेरा नारी मन’ हालांकि एक आलोचनात्मक पुस्तक जो वाणी प्रकाशन से आई थी…
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