संवाद की समरूपता में निहित है राष्ट्र की प्रगति
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साहित्य
हिन्दी आख़िर क्यों? : संवाद की समरूपता में निहित है राष्ट्र की प्रगति
भाषा किसी दो सजीव में संवाद स्थापित करने का माध्यम है। जीव-जन्तु, पशु-पक्षियों और मनुष्य के अस्तित्व से ही संवाद का आरम्भ माना जाता है। प्रत्येक सजीव अपनी प्रजाति से किसी ने किसी भाषा में संवाद करते हैं। कोयल…
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