श्वेता कुमारी
-
पर्यावरण
गाँवों की कालगत मध्यवर्तिता: विकास, संस्कृति और प्रकृति के बीच एक समग्र दृष्टि
विकास के वर्तमान विमर्श में गांवों को अक्सर पिछड़ेपन की निशानी मानते हुए उन्हें शहरी जीवन की ओर धकेला जा रहा है। लेकिन क्या यह दृष्टिकोण सही है? ग़ौर करने पर पाएंगे कि यह नज़रिया न केवल एक सांस्कृतिक…
Read More »