मृत्युंजय श्रीवास्तव
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मीडिया
आजाद भारत की पत्रकारिता के दृश्य-दर-दृश्य
किसी देश की पत्रकारिता उस देश की नब्ज होती है। इस नब्ज को सही-सही पढ़ने से जाना जा सकता है कि देश का ऊंट किस करवट बैठा हुआ है। यह भी कि भविष्य में वह ऊंट किस दिशा में…
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कृत्रिम मेधा
मानव चेतना का सौदागर
21 वीं सदी में भारतीय लोगों में नयी चीजों को स्वीकार करने का उत्साह इस कदर है कि वे चेतावनी की परवाह नहीं करते। अनसुना करते हैं। 19 फरवरी को एलन मस्क ने ‘ग्रोक थ्री’ लॉन्च किया है। भारत…
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सिनेमा
शब्द, दृश्य और बहुसंख्यकवाद
शब्दों का कितना मारक असर होता है इसका अहसास बहुतों को पहली बार तब हुआ होगा जब राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से शहजादा और पप्पू कहा गया था। भारतीय राजनीति में शब्दों से विपक्ष को घायल करने का…
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पुस्तक-समीक्षा
गोपेश्वर सिंह का आत्मावलोकन
गोपेश्वर सिंह की नई पुस्तक ‘आलोचक का आत्मावलोकन’ का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली (2023) में इसी जनवरी में हुआ। हिन्दी में गोपेश्वर सिंह ऐसे आलोचक हैं जो अपने को गाँधी, लोहिया और जेपी के चिंतन के करीब पाते…
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