भवानी प्रसाद मिश्र
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कविताघर
जो कहा जाए, वह कैसे कहा जाए
भवानी प्रसाद मिश्र की एक कविता है- ‘यह तो हो सकता है’- जिसकी शुरुआती पंक्तियाँ कुछ इस तरह हैं- ‘यह तो हो सकता है कि / थक जाऊँ मैं पढ़ने-लिखने से / कवि की तरह दिखने से / अच्छा…
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