जो पानी बह गया उसे फिर से छुआ नहीं जा सकता
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चर्चा में
जो पानी बह गया उसे फिर से छुआ नहीं जा सकता
7 अक्टूबर के टेलिग्राफ में प्रभात पटनायक का एक लेख है — A Promethian moment ( The farmer’s agitation challenges theoretical wisdom)। बंधन से मुक्ति का क्षण ; किसानों के आंदोलन ने सैद्धांतिक बुद्धिमत्ता को ललकारा है। जाहिर है,…
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