अर्थव्यवस्था के विकल्प की चिन्ता
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मुद्दा
असमानता की उपादेयता?
कोरोना क्या आया, भेद खुल गए। भेद जो खुले, वे भेद नहीं थे। जगजाहिर था, मगर ढंका तुपा था। जैसा चल रहा था, चल रहा था। जो चल रहा था, वही सामान्य था। व्यवस्था अपनी तरह से काम कर…
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