सबलोग
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Jan- 2019 -18 Januaryअनुपम स्मृति
मन्नू भाई मोटर चली ,पम पम पम
संकल्प सिंघई नवम्बर के दूसरे सप्ताह में, मैं छिन्दवाड़ा जिले की तामिया तहसील के पातालकोट इलाके का भ्रमण कर रहा था, मेरे मित्र गाड़ी चला रहे थे और कुछ पुराने नग्मे हमारे आनंद को दुगुना कर रहे थेI तभी एक…
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17 Januaryअनुपम स्मृति
अनुपम पथ के अनुपम राही – ब्रजरतन जोशी
ब्रजरतन जोशी जल चिन्तन के इतिहास पुरुष अनुपम मिश्र कोई बड़े दार्शनिक या अकादमिक विद्वान नहीं थे वरन् वे अपने चिन्तन मनन से साफ माथे का समाज बनाने की ओर अग्रसर एक द्रष्टा हैं। वे नहीं चाहते कि लोग…
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17 January
आधी आबादी की व्यथा
विनय जायसवाल भारत में महिलाओं की स्थिति के बारे में बात करते समय हमेशा यह बात रखनी चाहिए कि जिस तरह से भारत में सामाजिक रूप से दो देश इण्डिया और भारत रहते हैं, उसी तरह से इण्डिया…
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16 January
इस सदी में विश्वविद्यालय
अशोक वाजपेयी इस सदी में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में परिवर्तन का क्या एजेंडा हो इस पर विचार करने के लिए जो सम्मलेन शान्ति निकेतन में हुआ उसमे कई तरह की दृष्टियाँ प्रकट हुईं| एक छोर पर यह कि अगली सदी…
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14 January
भोजपुरी क्षेत्र में सांस्कृतिक आंदोलन – चिंटू कुमारी
चिंटू कुमारी जब हम भोजपुरी संस्कृति की बात करते हैं तो आम तौर पर लोगों के जेहन में एक ऐसी संस्कृति का चित्र आता है जिसमें कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकतर एल्बम ,गानों और सिनेमा में अभद्रता, अश्लीलता, छिछलापन,…
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13 January
भाषा आंदोलन और भारतीय लोकतंत्र
मिथिलेश कुमार झा लोकतंत्र के सिद्धांतों को हम वास्तव में कैसे और कहाँ सार्थक रुप में प्रभावी बना सकते हैं? इन विषयों पर विद्वानों के बीच हुए बहसों और चर्चाओं में,अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य पर अत्यधिक जोर दिया गया है। कुछ…
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12 Januaryचर्चा में
जींद से गुजरेगा 2019 का रास्ता ?
सोनू झा इनेलो विधायक हरिचंद मिड्ढा के निधन के बाद खाली हुई जींद विधानसभा सीट पर चुनावी बिगुल बज चुका है, जींद की जंग में इस बार चार मुख्य पार्टियां आमने सामने हैं, जिसमें जन नायक जनता पार्टी…
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11 January
जब बैसाखियाँ पाँव बनने लगें
अर्चना वर्मा न केवल हमारे बल्कि किसी भी समाज में आरक्षण की व्यवस्थाओँ और प्रावधानों के कारगर होने का पैमाना केवल यही हो सकता है कि वे अपने समाज में उत्तरोत्तर अप्रासंगिक और अनावश्यक होती चली जायें। सामाजिक…
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10 January
अखिल गोगोई और किसान आन्दोलन
राजन पाण्डेय असम के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अंग्रेजी दैनिक- ‘द असम ट्रिब्यून’ ने इस संगठन और उसके नेता का अघोषित बहिष्कार कर रखा है. भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारों ने इसके नेता को “माओवादी”, “देशद्रोही” और…
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10 January
आरक्षण से आगे
विजय कुमार फिर लगभग 30 साल का कोर्स पूरा हुआ कि पूरा भारतीय समाज खास कर युवा वर्ग आरक्षण समर्थन और आरक्षण विरोध की चक्की में पिसता रहा| हालात यह हो गई की समर्थन और विरोध करने वाले आपस में दुश्मनी…
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