India
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चतुर्दिक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ: हेडगेवार से मोहन भागवत तक
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ‘दुनिया का लम्बे समय तक चलने वाला फासिस्ट संगठन’ है। ‘द वायर’ में प्रकाशित अपने शोध और लेखों के साथ-साथ पार्थ पी. चक्रवर्ती को दिए एक इण्टरव्यू (जनवरी 2020) में बेंजामिन जकारिया ने संघ को…
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आवरण कथा
ईरान, इजरायल, अमेरिका और भारत
भारत और ईरान दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं वाले देश हैं। इजरायल नया-नया जन्मा एक देश है और संयुक्त राज्य अमेरिका मात्र ढाई सौ वर्ष पुराना देश है, जो 4 जुलाई 1776 को अस्तित्व में आया। यहूदियों की भूमि के…
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आवरण कथा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारत
आज पूरे विश्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई) की चर्चा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रादुर्भाव चौथी औद्योगिक क्रान्ति का उद्घोष है। लेकिन जहाँ इसमें अपार सकारात्मक सम्भावनाएँ देखी जा रही हैं, वहीं इसके सम्भावित दुष्परिणामों…
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देश
स्मृति, स्वप्न और यथार्थ का टकराव
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 25 नवम्बर 2025 को अयोध्या में राममन्दिर में ध्वजा फहराने के बाद अपने भाषण में ‘केवल वर्तमान के बारे में’ सोचने को न कहकर ‘भविष्य के बारे में भी’ सोचने की बात कही है। ‘दूर दृष्टि’…
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मुनादी
ओटीटी और डिजिटल युग का सांस्कृतिक विवेक
मनोरंजन और संचार की दुनिया आज जिस तीव्र परिवर्तन से गुजर रही है, उसका सबसे सशक्त प्रतीक ओटीटी प्लेटफार्म हैं। सिनेमा हॉल की अँधेरी गलियों से लेकर टीवी चैनलों की गहमागहमी तक, जिस दृश्य-संस्कृति ने दशकों तक हमारे जीवन…
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व्यंग्य
स्पोर्ट्समैन स्पिरिट कहां है?
देखी‚ देखी‚ इन इंडिया वालों की चीटिंग देखी! कहते हैं टीवी एंकरों का बहिष्कार करेंगे। बाकायदा चौदह नामों की तो सूची भी जारी कर दी है। उस पर यह धमकी और कि आगे नाम बढ़ा भी सकते हैं। बताइए‚ बेचारे…
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देश
भारत में मातृभाषाओं का संकट : चुनौतियां और समाधान
भाषा का संबंध इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से है। भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद की परंपरा बहुत पुरानी है और ऐसा सैकड़ों वर्षों से होता आ रहा है। यह उस दौर में भी हो रहा था, जब वर्तमान समय में प्रचलित…
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देश
विविधता में एकता का नाम है भारत
भारत एक बहुलतावादी देश है। जिसके कारण यहाँ बहुजातीय, बहुसांस्कृति और बहुधार्मिक मान्यताओं में विश्वास करने वाले लोग बसते हैं। यह अनेक संस्कृतियों का संगम स्थल है। भारत का सम्बन्ध किसी एक धर्म से न होकर अनेक धर्मों से…
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देश
कौन वह भारत-भाग्य-विधाता है
संविधान निर्माताओं ने भारत में गणतन्त्र की जो परिकल्पना की थी उसका मूल अभिप्राय था, गण (समाज) के लिये तन्त्र की स्थापना। ‘गण’ की पहचान के लिये संविधान की भूमिका में स्पष्ट रूप से लिखा गया था,” हम जो…
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सप्रेस फीचर्स
भारत की ओर लौटने का वक्त
सुरेन्द्रसिंह शेखावत कोरोना महामारी के दौर में भारतीय लोक-जीवन की अनेक बातें फिर से याद आने लगी हैं। कहा जाने लगा है कि भारतीय ग्रामीण जीवन पद्धति कोरोना जैसी व्याधियों से बचाने, मुक्त करवाने में कारगर हो सकती…
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