dhruv gupta
-
पर्यावरण
भारतीय संस्कृति में पर्यावरण की चिंता
पृथ्वी और उसके पर्यावरण की चिन्ता हमारी भारतीय संस्कृति की परम्परागत सोच रही है। प्राचीन भारत में पर्यावरण को बिगाड़ने वाले बड़े शहर और धुआँ उगलते कल-कारखाने तो नहीं थे और न ही ग्लोबल वार्मिंग की दूर तक कोई…
Read More » -
खुला दरवाजा
क्या सचमुच होती हैं परियाँ?
दुनिया की तमाम संस्कृतियों, कला और साहित्य में कुछ ऐसी रहस्यमय और तर्क से परे चीज़ें हैं जिन्हें हमने देखा तो नहीं, लेकिन जो अनन्त काल से हमारी सोच और जीवन की हिस्सा रही हैं। देवदूत, राक्षस, शैतान और…
Read More » -
खुला दरवाजा
गणेश : प्रकृति और पर्यावरण का विराट रूपक
तमाम काल्पनिक देवी-देवताओं, अंधविश्वासों और कर्मकांडों के बीच भी हमारे पुराणों में ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो अपनी दृष्टिसम्पन्नता और सरोकारों से चकित करती हैं। जरूरत है उन्हें वैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय तरीके से पढ़ने और सोचने की। पुराणों…
Read More » -
चर्चा में
जाति पूछो भगवान की
गांव में रामचरित मानस कथा के दस-दिवसीय आयोजन का आज अंतिम दिन था। जवार के लगभग दो हजार लोग एकत्र थे। हरिद्वार के स्वामी नित्यानंद महाराज भगवान विष्णु के दशावतारों की आध्यात्मिक व्याख्या कर रहे थे। कलियुग में हो…
Read More »


