हरिशंकर परसाई: व्यंग्य-दृष्टि और वर्ग-बोध
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यत्र-तत्र
हरिशंकर परसाई: व्यंग्य-दृष्टि और वर्ग-बोध
हिंदी-व्यंग्य के शीर्ष-पुरुष हरिशंकर परसाई के जन्म-शताब्दी-वर्ष में जिज्ञासा होती है कि उनकी कहानियों में व्यंग्य की चेतना प्रारंभ से थी, या वह धीरे-धीरे समय के साथ विकसित हुई। परसाई जबलपुर आने के बाद समाजवादियों के संपर्क में आए।…
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