मैं छीन लाऊंगा अपने देश को और सीने में छुपा लूँगा
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सामयिक
तालाब ठाकुर का
‘ठाकुर का कुआँ’ कविता दलित साहित्य की प्रथम पीढ़ी के साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि ने सन 1981 में लिखी थी। नब्बे के दशक के आरंभिक वर्ष में लिखी जाने वाली यह कविता हिंदी कविता में नए प्रस्थान की तरह है।…
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