भारतीय समाज में जाति का अनिवार्य बोझ
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मुद्दा
भारतीय समाज में जाति का ‘अनिवार्य’ बोझ
भारत तब परतन्त्र था और समय था उन्नीसवीं सदी का अन्तिम दशक। तमाम बाधाओं को पार करते हुए स्वामी विवेकानंद अमेरिका के शिकागो शहर पहुँचे और वहाँ आयोजित धर्मसंसद में भारतीय संस्कृति के विशिष्ट ही मानवतावादी चरित्र तथा आध्यात्मिकता…
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