बहुरूपिये
-
मुद्दा
विमुक्त, घुमंतू, अर्ध घुमंतू जनजातियां और साहित्य
इतिहास गवाह है भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध लोक जागरण – बुद्ध काल, भक्ति आन्दोलन व स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन के सारथी दलित, वंचित और हाशिये का समाज से थेजिनके संघर्ष के बिना ये जागरण निस्संदेह असम्भव थे किन्तु उन्हें बिसरा…
Read More » -
प्रसंगवश
गाँधी और घुमन्तू समाज
अश्विनी कबीर गाँधी की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। सरकारी विभागों से लेकर समाज के विभिन्न तबके उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनके सपनों को, उनकी जीवन यात्रा को नई पीढ़ी से परिचित करवा रहे…
Read More »
