किसान आन्दोलन
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सामयिक
किसान आन्दोलन : स्थापन और विस्थापन का खेल
“जो अन्न-वस्त्र उपजाएगा, अब सो कानून बनाएगा/ यह भारतवर्ष उसी का है, अब शासन वही चलाएगा।” (स्वामी सहजानंद सरस्वती) “यह आशा करना कि पूँजीपति किसानों की हीन दशा से लाभ उठाना छोड़ देंगे, कुत्ते से चमड़े की रखवाली…
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सामयिक
किसान-आन्दोलन : प्रश्न-प्रतिप्रश्न
तीनों काले कृषि कानूनों के खिलाफ़ एवं अनाजदरों के न्यूनतम मूल्य-निर्धारण(एम एस पी) के संदर्भ में विगत एक वर्ष से किसान-आन्दोलन करते रहे हैं। अब जाकर इतने समय बाद सरकार को लगा कि इन्हें वापस लेंगे। सरकार का वादा…
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सामयिक
किसान आन्दोलन की अद्वितीय उपलब्धियाँ
आज इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा के बाहर सड़कों पर इस देश के निरंकुश और तानाशाही स्वभाव के कर्णधारों द्वारा जबरन बैठाए गये अन्नदाताओं को बैठे पूरे 7 महीने से भी ज्यादा दिन हो गये…
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चर्चा में
कृषि कानून और किसान आन्दोलन
रामधारी सिंह दिनकर ने 1933 की अपनी एक कविता ‘दिल्ली’ में दिल्ली को ‘कृषक-मेध की रानी’ कहा है। स्वतन्त्र भारत में कृषि प्रश्नों, समस्यायों पर कम ध्यान दिया गया। सरकार किसी भी दल की रही हो, कृषि-सम्बन्धी सभी समस्यायों…
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मुद्दा
आन्दोलन की राह पर भारत के किसान
आज भारतीय किसान उद्वेलित है, आन्दोलन की राह पर है। भारत को गाँवों का देश माना जाता रहा है और गाँवों में अधिकांश आबादी का कृषि कार्य से जुड़े रहने के कारण भारत को कृषि प्रधान देश भी समझा…
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