सबलोग

सबलोग

लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी
  • Jan- 2019 -
    9 January

    सियासत की दुनिया में कोई किसी का सगा नहीं

      तमन्ना फ़रीदी   सियासत की दुनिया में कोई किसी का सगा नहीं होता है। यहां रिश्ते बेईमानी हैं तो इस दुनिया में न दोस्ती शिद्दत से निभाई जाती है और न ही दुश्मनी निभाने का सलीका किसी को आता…

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  • 9 January

    आरक्षण की विडम्बना

    राणा यशवंत की facebook से साभार साव जी की चाय-पकौड़े की दुकान पर पांडे जी का बेटा ग्राहकों की सेवा करता है, प्लेट-ग्लास भी धोता है. मैं बर्षों से यह देख रहा हूं. गांव में मेहनत-मजूरी की लाज से बचने…

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  • 8 January

    जनान्दोलन और महिलाओं की भागीदारी

     अंजलि दलाल अंतर्राष्ट्रीय शासन के सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों के अनुसार, लिंग समानता और पर्यावरण स्थिरता 21 शताब्दी के बहुत ही महत्वपूर्ण एवं अंतःसम्बन्धित लक्ष्य हैं। इसी दौरान, बहुत से पर्यावरण-आंदोलनों, जैसे चिपको आंदोलन, प्लाचीमाड़ा आंदोलन, ग्रीनबेल्ट आंदोलन (कीनिया), नर्मदा बचाओ…

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  • 7 January

    मासूमों को कैसे न्याय मिले

      निवेदिता यह कहना मुश्किल है कि बिहार के बालिका गृह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले के बावजूद बच्चियों को न्याय मिल पायेगा। जिस अपराध में सरकार और सरकारी मिशनरी ही शामिल हो उससे न्याय की उम्मीद…

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  • 6 January

    विकास और अस्तित्व का संघर्ष

      महेन्द्र यादव तथाकथित विकास के विनाशकारी रूप, भ्रष्टाचार, सरकारी अफसरशाही के निकम्मेपन, नेताओं के दावे और हकीकत के फासले, अपने लोगों की बातें अनसुनी करने वाली चुनी सरकार का नमूना एक साथ देखना हो तो बिहार का कोशी क्षेत्र…

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  • 4 January

    जनतन्त्र  और जनान्दोलन

      मणीन्द्र नाथ ठाकुर   यदि आज आप दुनिया के मानचित्र को लेकर बैठें और उसमें विश्व के अलग-अलग हिस्सों में जनतंत्र की हालत पर सोचना शुरू करें तो आपको लगेगा कि इस मायने में दुनिया अब एक हो गयी…

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  • 3 January

    ज्ञान  के मार्ग में बाधा

      महेश चन्द्र पुनेठा शिक्षा की बदली अवधारणा के अनुसार सीखना ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया है। ज्ञान का अर्थ सूचना और तथ्यों का संग्रह और उन्हें याद करना नहीं है, न ही उन्हें एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में स्थानांतरित…

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  • Dec- 2018 -
    27 December

    हाशिये के समाज का रंगमंच

    राजेश कुमार हाशिये के लोगों पर चाहे उसके साहित्य पर बातचीत हो या संस्कृति पर, घुमा फिरा कर बहस का कोई न कोई मुद्दा आ ही जाता है। आखिर ये हाशिया है क्या? लोगों को इस शब्द से पाला स्कूल…

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  • 26 December

    MSP बढ़ाना ही नहीं, फसल लागत घटाना भी ज़रूरी है

    अरुण तिवारी हिंदी पट्टी के तीन राज्यों के चुनावी नतीजों  में  किसानों की कर्ज माफी के वादे को एक निर्णायक आधार माना जा रहा है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यह समाधान नहीं, महज् कुछ समय के लिए राहत…

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  • 26 December
    शख्सियत

    विद्यार्थी को इंसान बनाने वाला शिक्षक चला गया

    बेजोड़  शिक्षक थे अभिमन्यु खाँ  मणीन्द्र नाथ ठाकुर मैं एक शिक्षक हूँ और यह प्रामाणिक तौर पर कह सकता हूँ कि जिन लोगों से मुझे शिक्षक बनने की प्रेरणा मिली उसमें से हमारे आदरणीय अभिमन्यु खाँ साहब प्रमुख थे। उनसे…

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