सबलोग
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Apr- 2019 -3 Aprilलोकसभा चुनाव
जब मतदान था एक पवित्र भाव – अरुण कुमार पासवान
बचपन से ही सुनते आए हैं चुनाव, राजनीतिक दल, सरकार, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री।तब पढ़ेलिखे बड़ों से,रेडियो या समाचारपत्र पढ़ने वाले लोगों से कुछ राजनीतिक बातें सुना करते थे।चुनाव के दिनों में नारे सुनते थे,पहले भोंपू से बाद में लाउडस्पीकर से…
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1 AprilUncategorized
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस – 2 अप्रैल
डॉ. अरविन्द जैन ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। उम्र बढ़ने के साथ बच्चों में इसके लक्षण पहचाने जा सकते हैं| ऑटिज्म के रोगी में आईक्यू लेवल अन्य से अलग होता है। गर्भावस्था में पोषक तत्वों में कमी के कारण…
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1 Aprilआवरण कथा
पाँच वर्षों का अन्त्यपरीक्षण
अनिल कुमार राय लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. जो अभी सत्ता में हैं, वे और जो सत्ता पाना चाहते हैं, वे भी अपने-अपने गुटों और समर्थकों की सेनाएँ सजाकर मुद्दों और मुहावरों के गोले-गोलियों की बौछार…
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Mar- 2019 -31 Marchराजनीति
मोदी से कहाँ चूक हुई?
दीपक भास्कर 2014 के आम चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने महज 60 महीने मतलब पांच साल के लिए वोट मांगे लेकिन चुनाव परिणाम से जाहिर था कि जनता ने उन्हें 10 साल के लिए अपना मत दिया…
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30 Marchदेश
शिक्षा, स्वास्थ्य और देश
रविशंकर सिंह सबसे बड़े लोकतंत्र में, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य जो व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है, इस पर पूंजीपतियों की इजारेदारी है और उन्हें लूट की छूट है। आज आप सरकारी स्कूलों और अस्पतालों का सर्वे कर के…
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28 Marchदेशकाल
आधुनिक लोकतंत्र एवं अवसर की समानता
आनन्द कुमार त्रिपाठी आधुनिक लोकतंत्रीय राज्यों में ‘ अवसर की समानता ‘ की लंबी चौड़ी बातें की जाती हैं , परंतु फिर भी यह देखने में आता है कि ऊंचे पदों पर कुछ विशेष वर्गों का एकाधिकार बना रहता…
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28 Marchसबलोग पत्रिका
सबलोग मार्च 2019 : संस्कृति का स्त्री स्वर
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27 Marchदेशकाल
आरक्षण: सामाजिक समरसता या सत्ता का रास्ता ?
करण सिंह साल की शुरूवाती महीने में संसद के पटल पर संविधान का 124वां संशोधन विधेयक केन्द्रीय मंन्त्री डॉ तावरचंद गहलोत द्वारा पेश किया गया था। जिसमें अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया गया जो अनुच्छेद 15…
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25 Marchराजनीति
भारत की राजनीति में उभरता तथा मजबूत होता परिवारवाद अथवा वंशवाद
दीपक भास्कर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ-साथ, भारत, अब लगभग एक शतक पुराना लोकतंत्र भी बनने के करीब है. इन तमाम सालों में, जहाँ एक तरफ भारतीय लोकतंत्र ने लगातार सफलतापूर्वक चुनाव की प्रक्रिया के तहत “सरकार-गठन”…
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25 Marchराजनीति
मोदी को हराना चाहते हैं चंद्रशेखर या जिताना?
जयप्रकाश कर्दम पिछले कुछ दिनों से, विशेष रूप से जब से लोकसभा चुनावों की सरगर्मी तेज़ हुई है, चंद्रशेखर ‘रावण’ को मीडिया द्वारा काफ़ी स्पेस दिया जा रहा है। कुछ दिन पहले बिना प्रशानिक अनुमति के रैली करने…
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