सबलोग
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Apr- 2019 -23 Aprilसिनेमा
सिनेमा: मनोरंजन बनाम फूहड़ता
कर्ण सिंह आज समय की रफ्तार को तो जैसे पंख लग गए हैं, वक्त के साथ हर चीज का व्यवसायीकरण होता जा रहा है। हर कोई अपनी तिजौरियों को भरने में लगा हुआ है, सामाजिक, नैतिक मूल्यों की…
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20 AprilDemocracy4you
लोकतंत्र या तंत्रलोक
अरुण कुमार पासवान राजतंत्र, कुलीनतंत्र, गणतंत्र, लोकतंत्र, मन्त्र तंत्र, स्नायु तंत्र, ऐसे-ऐसे शब्द हम तब से सुनते आए हैं जब न तो इनका अर्थ समझते थे न ही इनका, कम से कम तंत्र का तो अवश्य ही, उच्चारण करना…
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20 Aprilसाक्षात्कार
ये पाँच साल दमनकारी और डरावने रहे हैंॽ
दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवाणी का जिया अस सलाम द्वारा लिया गया साक्षात्कार यह कहना संभवत: ठीक होगा कि अगर ऊना न होता तो राजनीति में जिग्नेश मेवाणी नहीं रहे होते। ‘98 प्रतिशत कार्यकर्ता और 2 प्रतिशत…
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19 Aprilदेश
मानव का मानव से अलगाव ही जेट एयरवेज की डूबने की कहानी है
दीपक भास्कर मुझे याद है, तब मैं जेएनयू का छात्र था। एक जेट एयरवेज में काम करने वाले मित्र के यहाँ कभी-कभी जाता था। जब भी उनके घर जाता, खूब बातचीत होती और मैं बातचीत में कहता की…
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18 Aprilमुद्दा
दलितों को समझना होगा आर्थिक आन्दोलन के मायने – संजय रोकड़े
संजय रोकड़े भारत की सामाजिक संरचना में सबसे निचले पायदान पर जीवन बसर करने वाली अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए अब तक किसी भी दल या सरकार ने ईमानदारी से काम नही किया है। अब तक जितनी…
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17 Aprilमुद्दा
चुनावी तपिश में गुम होता हुआ पर्यावरण का मुद्दा !
महेश तिवारी जिस लोकतांत्रिक देश में बीते सात दशकों से लगातार जाति, धर्म के नाम पर चुनाव जीता जाता रहा हो। वहाँ पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन चुनावी मुद्दा होना चाहिए। लेकिन उस देश की दुर्गति देखिए जिसके संविधान…
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17 Aprilपश्चिम बंगाल
छूटती जाती आदिवासी जमीन
नेह अर्जुन इंदवार सदियों से आदिवासी समाज का वन पतराओं के साथ सह-अस्तित्व रहा है। जब कभी भी उनके जल-जंगल-जमीन को छीनने की कोशिश की गई, वह बहुत अशान्त हो जाता है। झारखंडी चाहे असम, भोटांग (बंगाल) गया…
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15 AprilDemocracy4you
लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर बड़ा खतरा – रामनरेश राम
रामनरेश राम सत्रहवीं लोकसभा के गठन के लिए आम चुनाव होने जा रहे हैं. यह चुनाव बहुत सारे मायनों में अलग होने जा रहा है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह आम सहमति की तरह बनता दिख रहा है…
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14 AprilDemocracy4you
भूमिहारी अस्मिता के बारे में कुछ वाजिब सवाल और बेगूसराय का चुनाव – विजय कुमार
विजय कुमार ऐसा नहीं है कि ऊँची जात के अन्दर ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है। जो लोग पुराने ग्रामीण समाज को जानते हैं उन्हें पता है कि ग्रामीण समाज में खासकर भूमिहार समाज में कभी अपनी ही जाति के लोगों…
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11 Aprilपुस्तक-समीक्षा
विक्रमशिला एवं इसके आचार्य दीपंकर के जमीन की तलाश
रमन सिन्हा 1970-80 के दशक में पुराविद् डॉ बीएस वर्मा के नेतृत्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) द्वारा भागलपुर जिला के कहलगांव अनुमंडल अन्तर्गत अंतीचक ग्राम में विक्रमशिला स्थल के उत्खनन परिणामों के आने के बाद ही यह…
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