सबलोग
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Jul- 2019 -2 Julyपुस्तक-समीक्षा
दास्तान ए ग़दर – राजीव राय
राजीव राय मूल किताब उर्दू में लिखी गई है। अंग्रेज़ी में इसका तरजुमा राना साफवी ने किया है। इस किताब के दो भाग हैं। पहले हिस्से में 1857 के विद्रोह, जिसे लेखक ज़हीर देहलवी ने सिर्फ़ ‘गदर’ कहा…
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1 JulyUncategorized
मन के जीते जीत है… स्वामी राम शंकर
विचार और ज्ञान की कबड्डी चाहे जितनी खेल ली जाए, पर मन के प्रबल बहाव में बच पाना बेहद मुश्किल होता है. पता है उस सड़क पर चलेंगे तो मंजिल पर पहुँचने की दूरी-अवधि और बढ़ जायेगी. फिर भी…
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1 Julyबिहार
जनतान्त्रिक चेतना मंच द्वारा आयोजित मुंगेरीलाल स्मृति व्याख्यान – चिंटू कुमारी
चिंटू कुमारी जनतान्त्रिक चेतना मंच द्वारा आयोजित मुंगेरीलाल स्मृति व्याख्यान जिसका विषय ‘सामाजिक न्याय और सामाजिक परिवर्तन’ है में मुझे मुंगेरीलाल आयोग की रिपोर्ट के एक विशेष पहलु – दलित महिला राजनैतिक चेतना और मुंगेरीलाल रिपोर्ट पर बोलने…
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Jun- 2019 -30 Juneसिनेमा
तीन लड़की, तीन रुपये और तीन पुलिसवाले – संदीप वसंत नाईक
संदीप वसंत नाईक तीन लड़कियों की कहानी 3 रुपयों से शुरू होती है और तीन पुलिसवालों की इर्द-गिर्द घूमती है, भारतीय संविधान की तीन मूल बातें – समानता, स्वतन्त्रता और भ्रातृत्व जैसे तत्वों से भरा भारतीय संविधान आज…
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25 Juneबिहार
इस बार बदला बदला सा आया हाजीपुर जंक्शन – पवन कुमार
पवन कुमार हमेशा ट्रेन की प्रतीक्षा में हमने हाजीपुर जंक्शन पे 2-3 घन्टे सुबह के बिताये, जो कुछ हमने देखा, वो सब यहाँ बताना चाहता हूं. सबसे पहले साफ सफाई पे लोग काफी लगे दिखे, इसके साथ कुछ…
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22 Juneसिनेमा
हिन्दी सिनेमा में तृतीयलिंगी – पुखराज जाँगिड़
पुखराज जाँगिड़ “माननीय कलक्टर साहब, अभी भारतवर्ष में कोनों सोचने का बखत आ गया है कि हम हिजड़े भी इंसान होते हैं, इंसान, कोनों अजूबा नहीं। पुराणकाल का इतिहास उठाके देख लें, हम किन्नरों ने मेहनत मशक्कत करके…
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21 Juneसमाज
मेरा गाँव बदल गया है -2 – रविशंकर सिंह
रविशंकर सिंह बदलते हुए गाँव का न केवल परिदृश्य बदला है, बल्कि गाँव की तहजीब भी बदली है। हमारे पुरखों में जो बड़ों के प्रति अदब और संस्कार थे वे समय के अनुसार धूमिल…
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20 Juneव्यंग्य
विभाजनकारी मानसिकता त्यागना ही विकल्प – वेद प्रकाश भारद्वाज
वेद प्रकाश भारद्वाज एक अख़बार में शीर्षक है ‘नीटः ओबीसी छात्र सर्वाधिक चयनित’। इस शीर्षक में हो सकता है कि ज़्यादातर लोगों को कुछ भी अजीब न लगे। इसी प्रकार जब हाल में सम्पन्न लोकसभा चुनाव के बाद…
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19 Juneसमाज
मेरा गाँव बदल गया है – रविशंकर सिंह
रविशंकर सिंह मैं सन 70 से 75 तक अपने गाँव में रहा और 75 से 85 तक कॉलेज की पढ़ाई के लिए अपने निकटवर्ती शहर भागलपुर में। उसके बाद नौकरी के सिलसिले में अब तक बाहर बाहर…
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18 Juneआन्दोलन परिक्रमा
दलित अस्मिता के लिए एकजुट होने का आह्वान – एनएपीएम टीम
एनएपीएम टीम उत्तराखण्ड में लगातार पिछले कुछ वर्षों में दलितों पर दमन की खबरें आती रही हैं। जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की ओर से 12.06.2019 को “उत्तराखण्ड में बढ़ते दलित अत्याचार: आगे की राह” विषय पर चर्चा…
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