सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत
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पुस्तक-समीक्षा
अंधेरे में रोशनी तलाशती एक किताब
मशहूर समाजवादी सच्चिदानंद सिन्हा ने अपने निबंध- ‘इक्कीसवीं सदी का समाजवाद: नए मूल्यबोध’ में लिखा है- “इस तरह की विकसित नई अर्थव्यवस्था और नए मूल्यबोध के लिए हमें शायद जीवन के उन आयामों को पुनर्जीवित करना होगा जिनके कुछ…
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