बड़ी पूँजी और कार्पोरेटीकरण का दबदबा
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मीडिया
बड़ी पूँजी और कार्पोरेटीकरण का दबदबा
क्या 200 साल की उम्र पूरा करने जा रही और इस लम्बे जीवनकाल में अनेकों उतार-चढ़ाव देख चुकी हिन्दी पत्रकारिता का यह ‘स्वर्ण युग’ है? जानेमाने सम्पादक सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने 90 के दशक में ही यह एलान कर…
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