आकांक्षा पाठक
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शख्सियत
भारतीयता के लेखक रेणु की प्रासंगिकता
बाजारवाद की आंधी में लेखक आते हैं और जाते हैं, लेकिन कुछ लिखते हैं और जन मानस की चेतना में ऐसे बस जाते हैं कि पूँजी की सम्पूर्ण शक्ति मिलकर भी उन्हें स्थगित नहीं कर पाती। रेणु ऐसे ही…
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