अरविन्द कुमार
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May- 2021 -5 Mayराजनीति
लोकतन्त्र में कब तक “खेला होबे”?
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का नतीजा जो भी आया हो लेकिन इस चुनाव में लगे नारे “खेला होबे” को वर्षों तक याद रखा जाएगा। भारतीय राजनीति में यह एक ऐसा अद्भुत नारा था जो इतना लोकप्रिय हुआ कि…
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Apr- 2021 -12 Aprilपरचम
साहित्य में सनसनी की भाषा
आपको जानकर यह आश्चर्य होगा की रेणु जन्मशती वर्ष में देश भर के 500 से अधिक लेखकों ने रेणु के साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर लेख लिखे हैं। यह हिन्दी साहित्य की पहली ऐसी घटना है जिसमें इतनी बड़ी…
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