शाम्भवी तिवारी
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Nov- 2024 -10 Novemberभाषा
भाषा का स्वराज: स्मृति से संस्कृति तक
माँ कभी दोपहर के भोजन के बाद फुर्सत पाती हैं तो अपने बचपन की कहानियाँ सुनाने लगती हैं। मैंने उन्हें सदा ही माँ की तरह देखा है। यह सोचना कि उन्होंने कभी मेरी तरह स्वच्छंदता और उद्दंडता के आधारों…
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