श्वेता कुमारी
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Aug- 2025 -23 Augustपर्यावरण
इकोसोशलिज्म: ए रेडिकल अल्टरनेटिव टू कैपिटलिस्ट कैटस्ट्रॉफ़ी
डूम्सडे क्लॉक या अंतिम समय की घड़ी, जो हमें यह संकेत देती है कि मानवता अपनी समाप्ति के कितने नज़दीक है, अब केवल परमाणु युद्ध के खतरे तक सीमित नहीं रही। आज, यह घड़ी न केवल न्यूक्लियर युद्ध के…
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5 Augustपर्यावरण
गाँवों की कालगत मध्यवर्तिता: विकास, संस्कृति और प्रकृति के बीच एक समग्र दृष्टि
विकास के वर्तमान विमर्श में गांवों को अक्सर पिछड़ेपन की निशानी मानते हुए उन्हें शहरी जीवन की ओर धकेला जा रहा है। लेकिन क्या यह दृष्टिकोण सही है? ग़ौर करने पर पाएंगे कि यह नज़रिया न केवल एक सांस्कृतिक…
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Apr- 2025 -28 Aprilपुस्तक-समीक्षा
स्त्रीवादी विमर्श की नई राहें: पितृसत्ता, यौनिकता और समलैंगिकता
स्त्रीवाद पर पठन-पाठन नया नहीं है, किन्तु हिन्दी जगत में अच्छे विमर्श प्रायः अपनी मूल भाषा में बहुत कम उपलब्ध रहे हैं। ऐसे में सुजाता जी की पुस्तक “पितृसत्ता, यौनिकता और समलैंगिकता” स्त्रीवादी विमर्श के विविध आयामों को समझने…
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