सच साहस और सत्ता के बीच फँसी चेतना

  • मुनादी

    सच, साहस और सत्ता के बीच फँसी चेतना

      हिन्दी पत्रकारिता का दो सौ वर्षों का इतिहास केवल समाचारों के प्रकाशन और प्रसारण का नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय आन्दोलन, वैचारिक बहसों और भाषाई आत्मनिर्भरता का इतिहास है। 1826 में पण्डित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा ‘उदन्त मार्तण्ड’ का…

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