आवरण कथाचर्चा मेंसिनेमास्तम्भ

माफ करें खेतान, आपने ‘धड़क’ के बहाने ‘सैराट’ का कत्ल क्यों किया?

 मराठी फिल्म ‘सैराट’ को अगर आपने देखा होगा तो आपके लिए बहुत कुछ होगा, जो सिनेमाघरों से बाहर आकर आपके बेडरूम तक चला आया होगा। दरअसल, ‘सैराट’ फिल्म ने एक लैंडमार्क सेट किया है मराठी फिल्मों को लेकर। अचानक सुर्खियों में आई फिल्म ने मराठी सिनेमा को कॉमर्शियली एक्लेम्ड किया। लिहाजा हिंदी के दर्शक भी सब-टाइटल्स के आसरे इस फिल्म को देखने में जुट गए।

मैंने भी ‘सैराट’ को इंटरनेट पर देखा और फिल्म शुरू होने के साथ ही हीरो-हीरोइन पार्श्या (आकाश थोसार) और आर्ची (रिंकू राजगुरू) की एक्टिंग स्किल्स ने बांधे रखा। अदाकारी से नजर हटी नहीं, लिहाजा सब-टाइटल्स देखकर डायलॉग समझने की कोशिश की भी नहीं। यहीं फिल्म अपनी खासियत बता देती है जहां एक्टिंग के जरिए ही भाषा का बंधन पीछे छूट जाता है। कुछ करोड़ में बनी ‘सैराट’ जब सौ करोड़ के मैजिकल फीगर को पार करती है तब जाकर दुनियाभर को मराठी सिनेमा की खासियत बेहतर तरीके से समझ आती है।

अब बात करते हैं हालिया रिलीज फिल्म ‘धड़क’ की। खूबसूरत लोकेशन्स, जबरदस्त गीत-संगीत, स्टार कीड्स, प्यार की नोकझोंक और आखिर में खुद को ठगे जाने का अनुभव। जी हां, ‘धड़क’ को देखकर ना तो आपके दिल झिंगाट नाचेगा और ना ही आप बॉलीवुड के प्रेम की सड़क पर दिल धड़काते आगे बढ़ते जाएंगे। तमाम कोशिशों के बावजूद फिल्म के निर्देशक शशांक खेतान आपको चपत लगाने से नहीं चूकेंगे।

दरअसल, बॉलीवुड में मसाला फिल्मों को बनाने के चक्कर में किस तरह से दूसरी भाषा की लैंडमार्क गढ़ चुकी फिल्मों का कत्ल किया जाता है, वह ‘धड़क’ देखकर आप आसानी से समझ सकते हैं। जिस तरह से ‘सैराट’ की आर्ची जिंदादिल बेखौफ है, उसके उलट ‘धड़क’ में जाह्नवी कपूर दिलकश लगी हैं। ना तो उनमें आर्ची जैसी बहादुरी है और ना ही कुछ और।

अगर आपने ‘सैराट’ देखी होगी तो आपको याद होगा किस तरह से आर्ची अपने प्रेमी को पीटते हुए देखकर चिल्लाती है। वो ट्रैक्टर चलाती है तो उसके चेहरे से वही आत्मविश्वास झलकता है जो उसके किरदार की मांग होती है। दूसरी तरफ दब्बू पार्श्या भी आर्ची से हौसला पाता रहता है। हालांकि शशांक खेतान ने जाह्नवी को पिस्तौल थमाकर आर्ची के मुकाबले खड़ा करने की कोशिश की है, लेकिन नाकाम रहे।

हकीकत में बॉलीवुड को अब खुद पर ध्यान लगाना होगा। इस तरह से किसी फिल्म को उठाकर रीमेक के नाम पर उसे चौपट करना बॉलीवुड के लिए सही नहीं है। अब बात करते हैं अदाकारी की तो जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर ने अपनी छाप छोड़ी है। ईशान में संभावनाएं हैं, आने वाले वक्त में वो बॉलीवुड के मशहूर सितारे बनेंगे, इसकी गुंजाइश दिखती है। दूसरी तरफ जाह्नवी कपूर ने भी बता दिया है कि उनका वक्त नहीं दौर आएगा।

अगर आप भी इस वीकएंड पर ‘धड़क’ देखने की सोच रहे हैं तो आप जरूर सिनेमाझरों का रूख करें। आपकी कोशिश नए कलाकारों को हौसला देगी। खूबसूरत लोकेशन्स और शानदार गानों से आपका भरपूर मनोरंजन भी होगा। लेकिन आप ‘सैराट’ को दिमाग से बाहर निकालकर हॉल के अंदर जाएं तभी यह सही रहेगा। क्योंकि, शशांक खेतान ने कोशिश बहुत की, ईशान-जाह्नवी ने साथ भी दिया। लेकिन, उस लैंडमार्क तक नहीं पहुंच सकें, जिसे ‘सैराट’ ने सेट कर दिया है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

अभिषेक मिश्रा
9939044050

mishraabhishek504@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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