सबलोग
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May- 2019 -5 Mayआवरण कथा
भारत को लोकतन्त्रात्मक गणराज्य बनाने की चुनौतियाँ
घनश्याम संसदीय राजनीति में अमूमन लोग दलों को ही विकल्प मानते हैं। लेकिन भारत के संविधान ने ‘भारत के लोगों’ के प्रति ’आस्था’ प्रकट की है। भारत के लोग भी एक संघीय गणराज्य ‘लोकतन्त्रात्मक गणराज्य’ के रूप में…
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4 Mayआवरण कथा
आदिवासी लेखन की उभरती चेतना की स्वरसंगिनी – प्रभाकर तिर्की
प्रभाकर तिर्की दरअसल आदिवासी चेतना का लेखन, एक तरफ अपनी पीड़ा खुद कहने, अपने सामाधान खुद ढुंढने की चेष्टा है, वहीँ वह अपनी संस्कृति को नष्ट करने, अपने संसाधनों पर कब्जा जमाने के षडयंत्रों के बरक्स प्रतिरोध की…
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2 Mayआवरण कथा
क्यों और किसे चुनें अपना प्रतिनिधि – सुनील कुमार
सुनील कुमार हमारा देश इन दिनों अपने लिए सांसद और केन्द्र की सरकार चुनने की कवायद में लगा है, लेकिन इसी लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को अमल होते हुए देखें तो क्या दिखाई देता है? क्या हम सचमुच ईमानदार लोकतान्त्रिक…
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2 Mayसबलोग पत्रिका
सबलोग अप्रैल 2019 : कसौटी पर सरकार और विपक्ष
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1 Mayआवरण कथा
झूठ की राजनीतिक खेती – विमल कुमार
विमल कुमार हर सरकार कुछ न कुछ काम करती ही है, उसकी कुछ प्राथमिकताएँ होती हैं| लेकिन वह कई काम नहीं भी करती है| यह अलग बात है कि काम करने में कुछ की रफ़्तार तेज होती है…
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Apr- 2019 -29 Aprilझारखंड
राजनीतिक पार्टियों के लिए घोषणा पत्र – लियो ए सिंह
लियो ए सिंह देश में चुनाव का मौसम चल रहा है । चुनावी दौर में हर राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए व्यापक रणनीति बनाता है जिसमें स्पष्ट पारदर्शी गतिविधियों से लेकर पर्दे के पीछे चलने वाले हथकंडे, जोड़-तोड, खींचतान सभी होते हैं। चुनाव लड़ने की इनकी इन्हीं तैयारियों का एक अहम हिस्सा होता है इनका घोषणापत्र, जिसके ज़रिये ये लोगों को यह बताने की चेष्टा करते हैं कि उन्हें सत्ता मिली तो वे लोगों की ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए, देश को प्रगति-पथ पर आगे ले जाने के लिए क्या करेंगे।इसको तैयार करने की क़वायद आसान नहीं होती। इसकी अहमियत को समझते हुए इसे तैयार करने की जवाबदेही सभी दल अपने सबसे समझदार नेताओं को देते हैं। इसमें समय भी लगता है। अब तो जनता का घोषणापत्र बनाने के नाम पर, भले ही दिखावे के लिए ही सही, ये समाज के विभिन्न तबक़ों, समूहों से राय भी लेते हैं।…
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29 Aprilआर्थिकी
10 प्रतिशत गरीब सवर्ण आरक्षण एक ऐतिहासिक धोखा है
दीपक भास्कर देश के सभी सरकारी संस्थानों में 10 प्रतिशत गरीब सवर्णों का जातिगत आरक्षण लागू करने के लिए रॉकेट गति से काम हो रहा है। दिल्ली विश्विद्यालय में मीटिंग पर मीटिंग हो रही है। लेकिन दिल्ली विश्विद्यालय…
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28 Aprilमुद्दा
पबजी की प्रीत में उलझा देश का भविष्य – महेश तिवारी
महेश तिवारी विज्ञान वरदान है, तो अभिशाप भी। विज्ञान की देन ही प्रौद्योगिकी है, तो उसी प्रौद्योगिकी के नवाचार का एक रूप है मोबाइल-फ़ोन। आज के समय में नित्य मोबाइल-धारकों की संख्या बढ़ने पर हम और हमारी रहनुमाई…
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25 Aprilझारखंड
आधुनिक पूँजीपतियों का साम्राज्य और वैश्विक लूट – राजेन्द्र रवि
राजेन्द्र रवि भारत और दुनिया के एक बड़े भूभाग में ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार के लिए आई थी। आगे चलकर उसी के गर्भ से इन देशों में ब्रिटिश हुकूमत का उदय हुआ। उस काल-खण्ड में ब्रिटिश हुक्मरान अपने…
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24 Aprilबिहार
मुजफ्फरपुर लोकसभा चुनाव और कुछ बातें
ब्रह्मानन्द ठाकुर मुजफ्फरपुर लोकसभा के लिए मतदान 5 वें चरण में यानि 6 मई को होने हैं। इस बार यहाँ एनडीए और महागठबंधन के उम्मीदवार चुनाव मैदान में आमने सामने हैं। दोनो प्रत्याशी एक ही जाति (निषाद समुदाय)…
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