<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	
	>
<channel>
	<title>
	Comments on: दो रुपये का लोकतन्त्र	</title>
	<atom:link href="https://sablog.in/two-rupee-democracy/13754/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://sablog.in/two-rupee-democracy/13754/</link>
	<description>सच के साथ, सब के साथ</description>
	<lastBuildDate>Sat, 19 Jun 2021 04:13:26 +0000</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>
	<item>
		<title>
		By: Ratnesh Kumar Sinha		</title>
		<link>https://sablog.in/two-rupee-democracy/13754/#comment-1168</link>

		<dc:creator><![CDATA[Ratnesh Kumar Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Jun 2021 04:13:26 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">https://sablog.in/?p=13754#comment-1168</guid>

					<description><![CDATA[महोदय, इस देश में हर पार्टी का अपनी हैसियत के अनुसार आईटी सेल है और ये वही काम करते हैं, जिसके बारे में आपने अपने एकांगी लेख में केवल सत्तासीन पार्टी को घसीट कर जो रहस्योद्घाटन किया है, वह सर्वविदित है, कोई रहस्य नहीं है, यह आधुनिक युग में पार्टी प्रचार का सशक्त माध्यम है। मैं यह इसलिए कह रहा हूँ कि जब हम लोकतन्त्र के स्वास्थ्य की बात करते हैं तो हमें रोग के सभी पहलुओं का उल्लेख करना चाहिए।आपकी चिन्ता जायज है, लेकिन यह केवल एक पार्टी पर निशाना करके यौक्तिक सिद्ध नहीं किया जा सकता। हर पार्टी के आईटी सेल में शिक्षित युवा &#039;पर्क&#039; के रूप हर ट्वीट पर कुछ अतिरिक्त राशि से लाभान्वित होते हैं। यह सर्वविदित है, इसलिए भ्रष्ट और निकम्मी सरकार की तीखी आलोचना करें, लेकिन आलोचना ऐसी हो कि वह समरस लगे, एकांगी और पार्टी प्रेरित नहीं। आपके लेख पर भी तो कहा जा सकता है कि आपका लेख विरोधी खेमे की मीडिया रणनीति का हिस्सा है। इसलिए मेरे विचार में यह लेख थोडी़ और जानकारी इकट्ठी करके लोकतन्त्र के समग्र सामयिक मूल्यांकन के रूप में प्रस्तुत किया जाता तो अत्यधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष होता।लेख के लिए बधाई!]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>महोदय, इस देश में हर पार्टी का अपनी हैसियत के अनुसार आईटी सेल है और ये वही काम करते हैं, जिसके बारे में आपने अपने एकांगी लेख में केवल सत्तासीन पार्टी को घसीट कर जो रहस्योद्घाटन किया है, वह सर्वविदित है, कोई रहस्य नहीं है, यह आधुनिक युग में पार्टी प्रचार का सशक्त माध्यम है। मैं यह इसलिए कह रहा हूँ कि जब हम लोकतन्त्र के स्वास्थ्य की बात करते हैं तो हमें रोग के सभी पहलुओं का उल्लेख करना चाहिए।आपकी चिन्ता जायज है, लेकिन यह केवल एक पार्टी पर निशाना करके यौक्तिक सिद्ध नहीं किया जा सकता। हर पार्टी के आईटी सेल में शिक्षित युवा &#8216;पर्क&#8217; के रूप हर ट्वीट पर कुछ अतिरिक्त राशि से लाभान्वित होते हैं। यह सर्वविदित है, इसलिए भ्रष्ट और निकम्मी सरकार की तीखी आलोचना करें, लेकिन आलोचना ऐसी हो कि वह समरस लगे, एकांगी और पार्टी प्रेरित नहीं। आपके लेख पर भी तो कहा जा सकता है कि आपका लेख विरोधी खेमे की मीडिया रणनीति का हिस्सा है। इसलिए मेरे विचार में यह लेख थोडी़ और जानकारी इकट्ठी करके लोकतन्त्र के समग्र सामयिक मूल्यांकन के रूप में प्रस्तुत किया जाता तो अत्यधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष होता।लेख के लिए बधाई!</p>
]]></content:encoded>
		
			</item>
	</channel>
</rss>
