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उत्तरप्रदेश

आपराधिक आतंक के सामने लाचार हुआ प्रशासन

 

उत्तरप्रदेश में अपराध नियन्त्रण का सरकारी दावा एक बार फिर धड़ाम साबित हुआ। राज्य की राजधानी लखनऊ के सटे जिला कानपुर में कुख्यात बदमाश को पकड़ने गयी तीन थाने की पुलिस टीम खुद अपनी सुरक्षा न कर सकी। बदमाशों ने घेरकर ताबड़तोड़ गोली-बम से हमला किया। इसमें डिप्टी एसपी, एक एसओ, तीन सब इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिए गये। इसके अलावा पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गये। घायलों में एक होमगार्ड, एक इंस्पेक्टर का प्राइवेट ड्राइवर भी शामिल है। उत्तरप्रदेश में यह पहली घटना है, जिसमें इतनी बड़ी तादाद में दबिश देने गये पुलिसकर्मियों को मार दिया गया।

उधर, प्रयागराज में नए एसएसपी अभिषेक दीक्षित के चार्ज लेने के अड़तालीस घन्टे के भीतर ही होलागढ़ क्षेत्र में घर के भीतर सोये एक ही परिवार के चार सदस्यों को धारदार हथियार से काटकर मार डाला गया। एक महिला जीवन-मौत के बीच अस्पताल में संघर्ष कर रही है। कानपुर और प्रयागराज की दिल दहला देने वाली वारदात से उत्तरप्रदेश थर्रा गया।

कानपुर में हुई वारदात के पीछे खाकी में छिपे ‘जयचंद’ की मुखबिरी का संदेह किया जा रहा है। बदमाशों ने एके 47 और 9 एमएम पिस्टल से जबरदस्त फायरिंग की। पुलिस ने कई घन्टे बाद विकास दुबे के मामा प्रेमप्रकाश पाण्डेय और उसके चचेरे भाई अतुल दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया। उनके पास लूट की एक रायफल और पिस्टल बरामद हुई है। बताया जा रहा है कि बदमाश यहाँ पुलिस के हथियार भी छीनकर फरार हो गये। आईजी मोहित अग्रवाल के अनुसार, पुलिस की एक एके 47 और दो ग्लाक पिस्टल, एक इंसास रायफल बदमाश छीन ले गये हैं।

उधर, प्रयागराज जिले के गंगापार में होलागढ़ क्षेत्र के बरई हरख के मजरे शुकुल का पूरा में चार लोगों की नृशंस हत्या के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो सकी है। इसमें विमलेश पाण्डेय उनका इकलौता बेटा प्रिंस और दो बेटियों श्रेया और शीलू की जिस तरीके से हत्या की गयी वह दिल दहला देने वाला है। घटना की सूचना पाकर मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर पहुँचकर आठ शहीद पुलिसकर्मियों को श्रृद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद आठों पुलिसकर्मियों के परिवार को एक-एक करोड़ रूपए आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। मीडिया से कहा कि अपराधियों को कड़ा सबक सिखाया जाएगा।

दबिश को गयी पुलिस पर हिस्ट्रीशीटर पड़ा भारी

कानपुर के चैबेपुर थाना के बिकरू गाँव में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ राहुल तिवारी नामक युवक ने तहरीर दी थी कि विकास दुबे उसके अपहरण और हत्या की साजिश कर रहा है। विकास दुबे पर राज्यमन्त्री दर्जा प्राप्त भाजपा नेता संतोष शुक्ला की शिबली थाने में घुसकर गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार देने, शिबली के ताराचंद्र इंटर कॉलेज के सहायक प्रबन्धक सिद्धेश्वर पाण्डेय की हत्या समेत अन्य कई गम्भीर किस्म के अपराध करने का आरोप पहले भी रहा है। पुलिस रिकार्ड मे यह पचास हजार का ईनामी भी है। बताया जा रहा है कि इसे पकड़ने के लिए तीन थाने के बीस पुलिसकर्मियों की टीम तैयार की गयी। डिप्टी एसपी रैंक के अफसर सीओ भी टीम के साथ रहे।

संदेह यह भी किया जा रहा है कि पुलिस के दबिश देने की सूचना बदमाशों को हो गयी। बदमाशों का दुस्साहस देखिये कि वे भागने की बजाए पोजीशन लेकर असलहों के साथ आसपास के घरों में डट गये। पुलिस के पहुँचने पर उन पर चैतरफा इस कदर फायरिंग की गयी कि वो संभल भी नहीं पाए। डिप्टी एसपी बगल के घर में जान बचाने के लिए छिपे तो वहाँ भी मौजूद बदमाशों ने उनको दीवार में सटाकर सिर में कई गोलियां मारीं, बाद में घर से बाहर लाकर कुल्हाड़ी से उनके पैर काट डाले।

कानपुर में डिप्टी एसपी, तीन दरोगा समेत आठ पुलिसकर्मियों के कत्ल से पूरे राज्य में हड़कंप है। सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। बड़े माफियाओं और दुर्दांत बदमाशों की लिस्ट जारी कर दी है। कानपुर के दुर्दांत बदमाश विकास दुबे पर पचास हज़ार से बढ़ाकर एक लाख रुपए का ईनाम घोषित कर दिया गया है। अन्य 18 नामजद आरोपियों पर पच्चीस-पच्चीस हज़ार रुपए का इनाम रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक 60 टीम खोज में लगाई गयी हैं। इसमें डेढ़ हजार दरोगा, एसटीएफ समेत क्राइम ब्रांच की 12 टीमें शामिल हैं। कई जिलों में अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जल्द ही बदमाशों पर तेजी से सिकंजा कसना शुरू हो जाएगा।

बहरहाल, इन दोनों नृशंस वारदातों ने उत्तरप्रदेश की कानून व्यवस्था पर अंगुली उठाने का मौका विपक्षी राजनैतिक दलों को दे दिया है। बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमन्त्री मायावती ने इसे योगी राज में लचर कानून व्यवस्था की संज्ञा दी है तो सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव ने भी योगी सरकार की घेराबन्दी की है।

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