sarvanand sonowal
असम

असम के मुख्यमन्त्री  सर्बानंद सोनोवाल से रविशंकर रवि की बातचीत

 

जो लोग एनआरसी से बाहर हो गए हैं, उनका अब क्या होगा?

सर्बानंद- भारतीय नागरिकों के लिए विकल्प खुले हुए हैं। वे विदेशी न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं। एनआरसी प्रकाशित होने की तिथि से 120 दिनों के अंदर विदेशी न्यायधिकरण के पास जाने के लिए समय होगा। पहले यह समय 60 दिनों का था, जिसे विदेशी (न्याधिकरण) संशोधन आदेश, 2019 में संशोधन कर 120 कर दिया गया है। लोगों को परेशानी न हो, इसलिए  200 नए विदेशी ट्रिब्यूनल स्थापित किए गए हैं और 200 एन ट्रिब्यूनल स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।

 

– जिन लोगों का नाम लिस्ट में नहीं है, सरकार उनकी कैसे मदद करेगी, उनका आखिरी मुकाम क्या होगा?

सर्बानंद- उनकी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिनके नाम राष्ट्रीय नागरिक सूची में शामिल नहीं होंगे, उन्हें विदेशी ट्रिब्यूलन का फैसला आने तक किसी प्रकार बंदी नहीं बनाया जाएगा। सरकार की तरफ से गरीब लोगों को कानूनी मदद दी जाएगी। लोगों में घबड़ाहट न हो, इसके लिए विभिन्न प्रचार माध्यम की मदद से बताया गया है।  फिर भी वे संतुष्ठ नहीं हुए तो ऊपरी अदालत का दरवाजा खुला है।

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– सरकार की आगे क्या तैयारी है?

सर्बानंद-हम राज्य को अवैध नागरिकों से मुक्त कराने के साथ मूल निवासियों की राजनीतिक, भाषिक और सांस्कृति रक्षाकवच के लिए असम समझौते की धारा -6 को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं।

 

– लिस्ट में तमाम ऐसे लोगों के नाम नहीं हैं, जो सेना में शामिल रहे हैं, सरकारी कर्मचारी रहे हैं या देश के किसी अन्य राज्य से असम में आए हुए हैं, उनका क्या होगा?

सर्बानंद- वैसे सभी लोग विदेशी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। मैं बार-बार कहा रहा हूं कि भारतीय मूल के लोगों की हर संभव मदद करूंगा। हमारी सरकार उनके साथ खड़ी है।

 

– ऐसे भी लोग हैं, जिनके परिवार के कुछ लोगों के नाम लिस्ट में हैं, कुछ के नहीं हैं? ऐसा क्यों?

सर्बानंद-एनआरसी की प्रक्रिया में हमारी सरकार शामिल नहीं थी। सारा काम माननीय उच्चतम न्यायालय की देखरेख में हो रहा था। अदालत ने राज्य सरकार को एनआरसी के कामकाज में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया था। इसलिए मेरे लिए यह कहना संभव नहीं है कि ऐसा क्यों हुआ। लेकिन उन्हें कानूनी सलाह राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। ।

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– जब तक ट्रिब्यूनल का फैसला नहीं आ जाता, तब तक एनआरसी से बाहर हुए लोगों के साथ क्या सुलूक किया जाएगा?

सर्बानंद- वैसे लोग पहले तरह अपनी जिंदगी जीएंगे। पुलिस को और प्रशासन को निर्देश दे दिया गया है कि ट्रिब्यूनल का फैसला आने तक उन्हें किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाए। यदि कोई परेशान करता है तो सरकार कार्रवाई करेगी।

 

– क्या एनआरसी से बाहर होने लोगों को राज्य और केंद्र द्वारा जारी सब्सिडी मिलती रहेगी?

सर्बानंद- उन्हें मिलने वाली सुविधाएं जारी रहेंगी, जब तक ट्रिब्यूनल का फैसला नहीं आ जाता है और उन्हें विदेशी घोषित नहीं कर दिया जाता है।

 

– जिन इलाकों में तनाव है, वहां कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार क्या कदम उठा रही है?

सर्बानंद- संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबल पहले से तैनात हैं। हालांकि एनआरसी के प्रकाशन के बाद कहीं से हंगामे की खबर नहीं है। स्थिति सामान्य है। फिर भी राज्य प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 

– क्या राज्य में और डिटेंशन सेंटर बनाए जाएंगे? बांग्लोदश सीमा से सटे जिलों में घुसपैठ रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

सर्बानंद- ये सब जरूरत के अनुसार केंद्र सरकार की सहमति से तय होगा। बांग्लादेशी सीमा से सटे इलाके में घुसपैठ रोकने के लिए कई उपाय किए गए हैं। सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। नदी मार्ग पर सीमा सुरक्षा बल को आधुनिक यंत्र दिए गए हैं। विवादास्पद इलाके में दोनों देशों के बीच भूमि विवाद को सुलझाकर बाड़ लगा दिया गया है। असम सीमा पुलिस की चौकरी बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं तुरंद ग्वालपाड़ा जिले से सटे सीमावर्ती इलाके में गया और एक रात रुका। हम सचेत और सर्तक हैं।

रविशंकर रवि

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और गुहाटी के प्रसिद्ध हिन्दी दैनिक पूर्वोदय के सम्पादक हैं|

सम्पर्क- ravighy@gmail.com +919435049631

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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