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	Comments on: ‘आई लव चिकन’ बनाम लव प्रकृति	</title>
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	<description>सच के साथ, सब के साथ</description>
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		By: Tejas Poonia		</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Tejas Poonia]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Nov 2023 04:27:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बहुत ही वैचारिक लेख है मैडम आपका। लेकिन जगह-जगह की गई अशुद्धियां बीच में अड़चन बनती है। लेकिन एक ज़रूरी मुद्दे पर विस्तार से लिखा है। लेकिन पढ़ने के बाद और इससे पहले और कई इस मुद्दे से जुड़े लेख पढ़कर , फिल्में देखकर बदलने की नौबत नहीं आई। मुझे लगता है यह हमारा नैतिक धर्म और कर्म होना चाहिए की पेड़ लगाए जाएं। इस देश में जितना सैनिक शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है उससे कहीं ज्यादा प्रकृति शिक्षा के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। हर स्कूल और कॉलेज चाहे निजी हो या सरकारी उनके हर बच्चे को हर साल एक पेड़ लगाना शुरू करवाना उसकी देख भाल करना सिखाया जाना चाहिए। और उसके नंबर भी जोड़े जाने चाहिए। इस मामले में मैं एक तरफा होकर कुमार विश्वास के भरत कुलम् की सराहना करता हूं। भले जो हो भीतर का सच लेकिन वो कम से कम कोशिश कर रहे हैं इसी तरह की। 
लेखन में गलतियां होती रहती हैं उम्मीद है आगे और सुधार देखने को मिलता रहेगा। हालांकि यह लेख 2021 में लिखा गया और आज 2023 में पढ़ रहा हूं तो मैं आश्वस्त हूं आपके प्रति ❤️❤️🙏🙏😊😊😊]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत ही वैचारिक लेख है मैडम आपका। लेकिन जगह-जगह की गई अशुद्धियां बीच में अड़चन बनती है। लेकिन एक ज़रूरी मुद्दे पर विस्तार से लिखा है। लेकिन पढ़ने के बाद और इससे पहले और कई इस मुद्दे से जुड़े लेख पढ़कर , फिल्में देखकर बदलने की नौबत नहीं आई। मुझे लगता है यह हमारा नैतिक धर्म और कर्म होना चाहिए की पेड़ लगाए जाएं। इस देश में जितना सैनिक शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है उससे कहीं ज्यादा प्रकृति शिक्षा के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। हर स्कूल और कॉलेज चाहे निजी हो या सरकारी उनके हर बच्चे को हर साल एक पेड़ लगाना शुरू करवाना उसकी देख भाल करना सिखाया जाना चाहिए। और उसके नंबर भी जोड़े जाने चाहिए। इस मामले में मैं एक तरफा होकर कुमार विश्वास के भरत कुलम् की सराहना करता हूं। भले जो हो भीतर का सच लेकिन वो कम से कम कोशिश कर रहे हैं इसी तरह की।<br />
लेखन में गलतियां होती रहती हैं उम्मीद है आगे और सुधार देखने को मिलता रहेगा। हालांकि यह लेख 2021 में लिखा गया और आज 2023 में पढ़ रहा हूं तो मैं आश्वस्त हूं आपके प्रति ❤️❤️🙏🙏😊😊😊</p>
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