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	Comments on: डॉ.कृष्णबिहारी मिश्र की दरवेशी दृष्टि	</title>
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		<title>
		By: सेराज खान बातिश		</title>
		<link>https://sablog.in/dr-krishna-bihari-mishras-dervish-vision/14919/#comment-1272</link>

		<dc:creator><![CDATA[सेराज खान बातिश]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Nov 2021 09:03:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बहुत ही जानकारी भरा आलेख है। मिश्र जी को समझने के लिए मृत्युंजय जी का यह आलेख बहुत 
सहायक होगा।
वर्षों से महानगर में रहते हुए भी वे हम जैसे गंव‌ई लोगों से भोजपुरी में ही बतियाना पसंद करते हैं।
मित्र अकबर हुसैन अकबर का यह शेर उनके लिए
सटीक बैठता है - तुम वो बरगद हो, जिसके साये तले
                        कितने   गौतम    ने    रौशनी  पाई]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत ही जानकारी भरा आलेख है। मिश्र जी को समझने के लिए मृत्युंजय जी का यह आलेख बहुत<br />
सहायक होगा।<br />
वर्षों से महानगर में रहते हुए भी वे हम जैसे गंव‌ई लोगों से भोजपुरी में ही बतियाना पसंद करते हैं।<br />
मित्र अकबर हुसैन अकबर का यह शेर उनके लिए<br />
सटीक बैठता है &#8211; तुम वो बरगद हो, जिसके साये तले<br />
                        कितने   गौतम    ने    रौशनी  पाई</p>
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		<title>
		By: संजय जायसवाल		</title>
		<link>https://sablog.in/dr-krishna-bihari-mishras-dervish-vision/14919/#comment-1269</link>

		<dc:creator><![CDATA[संजय जायसवाल]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Nov 2021 07:24:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शोधपरक लेख।कृष्ण बिहारी जी के रचनाकर्म के विविध पहलुओं पर तथ्यात्मक और आत्मीय लेखन।उनकी रचनाओं के संदर्भ को तीसरी पीढ़ी के साथ जोड़कर देखना इस लेख को और भी प्रासंगिक बनाता है।धन्यवाद और बधाई मृत्युंजय जी।पढ़ते समय ऐसा लगा कि लेख नहीं एक कहानी पढ रहे हैं।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>शोधपरक लेख।कृष्ण बिहारी जी के रचनाकर्म के विविध पहलुओं पर तथ्यात्मक और आत्मीय लेखन।उनकी रचनाओं के संदर्भ को तीसरी पीढ़ी के साथ जोड़कर देखना इस लेख को और भी प्रासंगिक बनाता है।धन्यवाद और बधाई मृत्युंजय जी।पढ़ते समय ऐसा लगा कि लेख नहीं एक कहानी पढ रहे हैं।</p>
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		<title>
		By: आशुतोष सिंह		</title>
		<link>https://sablog.in/dr-krishna-bihari-mishras-dervish-vision/14919/#comment-1265</link>

		<dc:creator><![CDATA[आशुतोष सिंह]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Nov 2021 14:38:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बहुत जरूरी आलेख। बधाई। आलेख की भाषा भी कृष्ण बिहारी मिश्र जी की ही तरह प्रांजल।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत जरूरी आलेख। बधाई। आलेख की भाषा भी कृष्ण बिहारी मिश्र जी की ही तरह प्रांजल।</p>
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			</item>
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		<title>
		By: मंजू रानी सिंह		</title>
		<link>https://sablog.in/dr-krishna-bihari-mishras-dervish-vision/14919/#comment-1264</link>

		<dc:creator><![CDATA[मंजू रानी सिंह]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Nov 2021 13:45:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कृष्णबिहारी मिश्र पर लिखा यह सचमुच एक विरल रेखाचित्र -सी रोचक रचना है।यह विशेषकर मिश्र जी के सम्पर्क में आए लोगों के लिए अत्यंत ही आस्वादमय, रस मय बन पड़ा है।हांलाकि कृष्णबिहारी जी के व्यक्तित्व का चित्र खींचने के लिए लेखक ने कई प्रसंग ,कई महत लेखकों आदि के कथनों का उल्लेख किया है पर इन सबमें विजय बहादुर सिंह जी वाला प्रसंग सबसे अनूठा और सटीक लगता है ।उन्होंने चमत्कृत करते हुए पता नहीं कैसे इतने कम शब्दों में इतने पैने ढंग से उनके व्यक्तित्व का चित्र खींचा है कि कोई अनजान पाठक भी सहज ही कृष्णबिहारी जी को जानने ,पढ़ने के लिए आकुल हो जाए।
मृत्युंजय श्रीवास्तव ने हमेशा की तरह इसमें भी खोजी नज़र और सधी भाषा को कायम रखा है इसके लिए उन्हें बहुत साधुवाद।]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>कृष्णबिहारी मिश्र पर लिखा यह सचमुच एक विरल रेखाचित्र -सी रोचक रचना है।यह विशेषकर मिश्र जी के सम्पर्क में आए लोगों के लिए अत्यंत ही आस्वादमय, रस मय बन पड़ा है।हांलाकि कृष्णबिहारी जी के व्यक्तित्व का चित्र खींचने के लिए लेखक ने कई प्रसंग ,कई महत लेखकों आदि के कथनों का उल्लेख किया है पर इन सबमें विजय बहादुर सिंह जी वाला प्रसंग सबसे अनूठा और सटीक लगता है ।उन्होंने चमत्कृत करते हुए पता नहीं कैसे इतने कम शब्दों में इतने पैने ढंग से उनके व्यक्तित्व का चित्र खींचा है कि कोई अनजान पाठक भी सहज ही कृष्णबिहारी जी को जानने ,पढ़ने के लिए आकुल हो जाए।<br />
मृत्युंजय श्रीवास्तव ने हमेशा की तरह इसमें भी खोजी नज़र और सधी भाषा को कायम रखा है इसके लिए उन्हें बहुत साधुवाद।</p>
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