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क्‍यूबा के पास स्वनिर्मित वैक्सीन

 

क्यूबा, कोरोना से परेशान होने के बावजूद दुनिया के उन कुछ देशों में है, जिनके यहाँ अब तक किसी विदेशी वैक्सीन से टीकाकरण शुरू नहीं हुआ बल्कि उसने अपनी ही वैक्सीन विकसित की। कैरिबियाई द्वीप-देश क्यूबा एक-दो नहीं बल्कि पांच कोरोना वायरस वैक्सीन कैंडिडेट बनाने पर काम कर रहा है। इनका तीसरा ट्रायल चल रहा है। इस तरह क्यूबा पहला ऐसा लैटिन अमेरिकी देश होगा, जिसके पास स्वनिर्मित वैक्सीन होगी। क्यूबा के मेडिकल इतिहास को देखते हुए ये बहुत आश्चर्य की बात नहीं है कि क्‍यूबा के वैज्ञानिक एक साथ पांच वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। इनमें से दो वैक्सीन अपने अन्तिम चरण में हैं। इनमें से एक को स्पेनिश नाम ‘सोबराना’ दिया गया है, जो अंग्रेजी शब्द सॉवरीन का समानार्थी है। जिसका अर्थ होता है संप्रभुता। हालांकि इस सीरीज की दो और भी वैक्सीन हैं। एक और वैक्सीन एबदाला का नामकरण क्यूबा के राष्ट्रवादी-क्रांतिकारी जोस मर्ति की कविता के नाम पर किया गया है। इसके अलावा दो वैक्सीन्स को क्यूबा को स्पेन से आजादी दिलाने वालों को समर्पित किया गया है।

सोबराना-2 वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल में 44 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए हैं। दूसरे चरण में 75 हजार लोग शामिल हुए थे। इसे सेंटर फॉर स्टेट कंट्रोल ऑफ मेडिसिन्स, इक्युपमेंट और मेडिकल डिवाइसेज को भेज दिया गया है, जहाँ से मंजूरी के बाद सार्वजनिक उपयोग के लिए ये अस्पतालों में पहुंचेगा। ईरान और वेनेजुएला में भी इसका ट्रायल चल रहा है। हमारे देश को क्‍यूबा से कुछ सीखना चाहिए। आत्मनिर्भरता का प्रोपेगेंडा करने की तुलना में आत्मनिर्भर बनना कठिन होता है लेकिन अगर इच्‍छाशक्‍ति हो तो बिना किसी की मदद और अल्प संसाधनों के बावजूद सफलता प्राप्त की जा सकती है।

इसके बारे में क्‍यूबा के जनस्वास्थ्य मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार हवाना में कोविड 19 संक्रमण से निपटने के लिए सार्वजनिक टीकाकरण अभियान की शुरूआत हो रही है। यह टीकाकरण क्‍यूबा की एक अन्य स्वनिर्मित वैक्सीन एबदाला से प्रारंभ होगा। टीकाकरण के पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों और विद्यार्थियों को टीका लगाया जाएगा। हवाना में प्रांतीय रक्षा समिति की मीटिंग में यह फैसला लिया गया। हवाना शहर के 15 नगरनिगम क्षेत्रों में चार लाख नागरिकों को यह टीका लगाया जाएगा। क्‍यूबा के स्वास्थ्य मंत्री जोस एंजल पोर्टल ने कहा है कि शीघ्र ही इस कार्यक्रम को दूसरी वैक्सीन सोबराना-2 के उपयोग से हवाना के बाकी नगरनिगम क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी सूचना दी कि अभी तीन और वैक्सीन कैंडिडेट सोबराना-1, सोबराना प्लस तथा माम्बीसा ट्रायल के अग्रिम चरण में हैं।  शीघ्र ही जिनके उत्पादन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।

वहीं हवाना के विख्यात ‘फिनले इंस्टिट्यूट ऑफ वैक्सीन इन हवाना’ के महानिदेशक प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ विसेंट वैरेज बेनकोमो ने गत माह लंदन से निकलने वाले सुप्रसिद्ध विज्ञान जर्नल ‘नेचर’ के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि एडवांस्ड वैक्सीन कैंडिडेट सोबराना-2, एबदाला और माम्बीसा ट्रायल के तीसरे चरण में हैं।

Can Cuba beat COVID with its homegrown vaccines?

यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सोबराना-2 एक बहुत प्रगत और प्रभावी वैक्सीन है जो कम संक्रमित व्यक्ति तथा अधिक संक्रमित व्यक्ति दोनों पर कारगर साबित हुई है। इसमें कोरोना वायरस के स्पाईक प्रोटीन के साथ डिएक्टिवेटेड टिटेनस टॉक्सिन भी मिला है। जिससे शरीर में शक्तिशाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं का निर्माण होता है। यह वैक्सीन दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और ब्रिटेन के वैरिएंट और कई स्ट्रेन पर भी कारगर है। डॉ बेनकोमो ने 2012 में अपनी टीम के साथ हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन की खोज भी की थी।

लगभग 1.15 करोड़ की आबादी वाले इस छोटे से देश में कई ऐसी विशेषताएं हैं जिससे इसका हेल्थकेयर सिस्टम पूरी दुनियाभर में सराहा जाता है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाईजेशन का भी मानना है कि यहाँ की स्वास्थ्य सुविधाओं से दुनिया के अन्य देश बहुत कुछ सीख सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल लगभग 60 देशों में क्यबूा के 30 हजार डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं। क्यूबा में हर 155 लोगों पर 1 डॉक्टर उपलब्ध है। ये अमेरिका और इटली से बेहतर है। बेहतरीन विशेषज्ञों की वजह से क्यूबा लम्बे समय से ही अपने यहाँ दुनियाभर के डॉक्टरों को ट्रेनिंग दे रहा है।

यहाँ लेटिन अमेरिकन स्कूल ऑफ मेडिसिन में फिजिशियन्स को प्रशिक्षण मिलता है। साल 1998 से अबतक 123 देशों के डॉक्टर यहाँ प्रशिक्षण पा चुके हैं। यूनाईटेड नेशंस के पूर्व सेक्रेटरी जनरल बान की मून के अनुसार क्यूबा का मेडिसिन स्कूल, लेटिन अमेरिकन स्कूल ऑफ मेडिसिन दुनिया का सबसे आधुनिक मेडिकल स्कूल है। यही वजह है कि क्यूबा की मेडिकल सुविधाओं को क्यूबन मॉडल के नाम से दुनिया में जाना जाता है। यहाँ बायोटेक उद्योग का आरंभ 1980 में हुआ था।

Optimism as Cuba set to test its own Covid vaccine - BBC News

ध्यातव्य है कि 2020 के मार्च में जब यूरोपियन देश कोरोना से लड़ रहे थे और दुनियाभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ वहाँ जाने से घबराने लगे थे, तब क्यूबा जैसे छोटे देश ने अपने डॉक्टरों की टीम यूरोप के अलावा वेनेजुएला, निकारगुआ, जमैका और सूरीनाम भी भेजी, जहाँ कोरोना तांडव कर रहा था। यह विडम्बना ही है कि देश में विशेषज्ञता प्राप्त डॉक्टर तो हैं लेकिन आर्थिक तंगी भी है। ऐसे में डॉक्टरों को बाहर भेजा जाना क्यूबा की अर्थव्यवस्था को एक तरह से मदद भी करता है। इस बारे में अमेरिकी इकनॉमिक इंटेलिजेंस युनिट के विशेषज्ञ मार्क केलर का मानना हैं कि जब वेनेजुएला में साल 1998 में अंदरूनी कलह हुई (अमेरिकी साजिश से), उसके बाद वेनेजुएला और क्यूबा एक-दूसरे की मदद करने लगे। तेल के मामले में मजबूत वेनेजुएला क्यूबा को पैसों और तेल की मदद करता था, तो बदले में क्यूबा उसे डॉक्टर और खेल प्रशिक्षक भेजता रहा।

क्यूबा के डॉक्टर जब ग्रेजुएशन कर लेते हैं तो उन्हें ऐसे ही किसी देश में भेजा जाता है, जहाँ संक्रामक बीमारी फैली हो या कोई दूसरी जरूरत हो। अक्सर वे 1 से 2 साल तक वहाँ काम करते हैं। संक्रमित जगहों पर जाने से पहले अस्पताल उनकी सख्त ट्रेनिंग करवाते हैं, जिसमें पर्सनल सेफ्टी का ध्यान रखना सबसे जरूरी होता है। साथ ही उन्हें उस देश की भाषा, खानपान और संस्कृति का भी बेसिक ज्ञान दिया जाता है।

यहाँ के मेडिसिन स्कूल को दुनिया का बेहतरीन मेडिकल स्कूल कहा जाता है। अब ये देश अमेरिका से टीका लेने की बजाए अपने लिए कोरोना वैक्सीन बनाने में सक्षम हो गया है। यह क्‍यूबा के लिए गौरव की बात है।

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