पुस्तक-समीक्षा

यथार्थ से संवाद कराती ‘अठन्नी’ 

 

  • सौरभ के.स्वतंत्र  

 

अठन्नी (कहानी संग्रह)

[बोधि प्रकाशन, जयपुर मूल्य-150 रुपये] 

[कथाकार-सीमा स्वधा]

सीमा स्वधा की बाईस कहानियों का संग्रह है अठन्नी| बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित  इस संकलन में विविध विषयों पर आधारित कहानियाँ हैं जिसका आधार कहानीकार का जीवनानुभव प्रतीत होता है| कल्पनायें हैं भी तो इसी तरह हैं जो कहानी की विश्वसनीयता को जरा भी प्रभावित नहीं करती|

वे जीवन के अनुभवों से इस तरह जुड़ी हैं कि यथार्थ जीवन की प्रतिच्छाया का साक्षात्कार होता है इन कहानियो में|

वैसे तो सीमा स्वधा की प्रकाशित यह दूसरी किताब है पर लेखिका की कहानियों का यह पहला संग्रह है जो विषय वैविध्य और अनुभव की विश्वसनीयता के कारण उल्लेखनीय है|

संग्रह में संकलित कहानी अँधेरी सुरंग से गुजरकर… आज रिश्तों में गुम होती ऊष्मा तथा स्व और स्वार्थ के दायरे में घिरे रिश्तों की सच बयां करती है| एक अकेली स्त्री का संघर्ष, उसका जीवन तब अर्थहीन हो जाता है, जब उसकी अपनी संतान ही उसे त्याग देती है|

शीर्षक कहानी ‘अठन्नी’ का चरित्र वो पागल दुनिया की स्वार्थ से बिल्कुल परे संवेदना का साक्षात्कार कराता है जो अन्तर्मन को गहरे छूती है| अन्य उल्लेखनीय कहानियों में उसका सच, पागलपन, काया-कल्प, पनियहवा माई शिल्प और कथ्य के स्तर पर प्रयोग जाहिर करते हैं और सशक्त बन पड़े हैं|

शीर्षक भी जरा लीक से हटकर है पर संग्रह के भाव को व्यक्त करने में सफल है| तमाम रचनाओं से गुजरते हुये एक कसक सी बनी रहती है| कुछ वैसा ही जैसे अधूरेपन का एहसास जिससे हर हाल में उबरने की इच्छा मन में उपजती है| शायद अधूरेपन को दर्शाता है यह शीर्षक ‘अठन्नी’|

कहा जाये तो कथाकार सीमा स्वधा का यह सराहनीय प्रयास है जिसमे कहन और कथ्य बिल्कुल नैसर्गिक प्रतीत होते हैं| ये कहानियाँ चर्चा, तवज्जो की माँग करती हैं ताकि विविध पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित हो सके|

हिन्दी पाठकों के अनुभव संसार में अपनी उपास्थिति दर्ज करायेगी ये कहानियाँ जो पाठकों के जेहन में लम्बे समय तक रहेंगी|

लेखक अध्यापन एवं स्वतन्त्र लेखन करते हैं|

सम्पर्क – +917004732410, saurabh.swatantra@gmail.com

 

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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