व्यंग्य

बदनाम बाबाओं का मकड़जाल

 

  • रंगनाथ द्विवेदी

 

आजकल पचास वर्ष पुरे कर चुके बाबाओं और नेताओं की कामशक्ति का “व्लडप्रेशर,हार्टबीट दोनो ही नौजवानों से बढ़िया व लाजवाब है”.नौजवानों को इनकी उम्र के सापेक्ष बोहनी नही हो रही.जबकि बाबाओं की जवानी की कामक्रीडा का लालित्य अद्भुत व अलौकिक है.नौजवानों की हालत इस हताशा व निराशा के चलते टेलीविजन के उस प्रचार सी हो गई है, जिसमें कलाकार कहता है कि–“कुछ लेते क्यो नही”.

ऐसे तथाकथित रोमांटिक बाबाओं के गुप्त सर्वे से हमें ये पता चला है कि–“अपने आश्रम मे भांति-भांति के लिपस्टिक व औरतो का सेवन करने वाले बाबाओं की मृत्युदर में भयंकर गिरावट आई है”. नौजवानों में मोहब्बत से हताश व निराश पेसेंटो की संख्या मे दस गुनी वृद्धि हुई है.इनमें से कुछ तो आजकल ऐसे नीम-हकीमों के यहां चक्कर लगा रहे जो—“पिछली तीन पिढ़ियो से इस गुप्त बीमारी के सफल इलाज की गारंटी का दावा कर रहे है”

इन वृद्ध व पचास वर्ष पारकर चुके बाबाओ का मोहब्बत में–“ये ओलंपिक विजय अर्थात् लिपस्टिक लगे होठों के चुंबन का ये गोल्ड प्रदर्शन”. युवाओं और भावी नौजवानों को कही विफलता व हताशा के स्याह अंधेरे मे तबाह व बर्बाद न कर दे. पता नही आजकल प्रकृति मे ऐसी क्या तकनीकी मकी खराबी आ गई है, कि इन–“बाबाओं के आश्रम का ये रोमांटिक हनीमून थमने का नाम नही ले रहा,इन बाबाओं की जवानी भी इस समय किसी भी नौजवान से कही ज्यादा खतरे के निशान से ऊपर है”.

अब भारत के आश्रम मे इन रंगीन वृद्ध बाबाओं का प्रदर्शन एक गंभीर राष्ट्रीय रोमांटिक समस्या का रुप लेता जा रहा है.ये अब भारत सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस समस्या से नौजवानों को निजात दिलाने के लिये भारत के समस्त मोहब्बत के वैज्ञानिक जानकारो का एक राष्ट्रीय अधिवेशन रखे.जिसमें इन वृद्ध बाबाओ के लिये—“लिपिस्टिक, चुंबन,सेक्स कंट्रोल इंसुलिन इजाद कर इन बाबाओ के लिये अनिवार्य कर दे”.

लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं|

सम्पर्क- +917800824758, rangnathdubey90@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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