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व्यंग्य

इधर भी ब्रेकअप उधर भी ब्रेकअप – वेद प्रकाश भरद्वाज

 

  • वेद प्रकाश भारद्वाज

देश इन दिनों गम्भीर संकट में है। स्वरा भास्कर को आप भले ही न जानते हों पर इससे कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता। फ़र्क इस बात से पड़ता है कि उनका अपने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया है। मीडिया में यह एक बड़ी ख़बर है। यह पहली ख़बर नहीं है। इस तरह की ख़बरें अक़्सर बेचैन कर जाती हैं। किसी देसी या विदेसी सुंदरी या सुंदरा के ब्रेकअप की ख़बर मीडिया में किसी संकट की तरह आती है। वैसे ब्रेकअप सुंदरियों और सुन्दराओं के बीच ही नहीं होता, अपनी राजनीति में भी होता है। इन दिनों कर्नाटक में कुछ कांग्रेसी व जदयू विधयकों ने अपनी-अपनी पार्टी से ब्रेकअप कर लिया है। वैसे भी कर्नाटक के सन्धि विच्छेद करें तो बनता है कर नाटक सो वहाँ ब्रेकअप के नाटक चल रहा है। और गोवा, वहाँ के कांग्रेसी तो और चार कदम आगे हैं। 15 में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं। यानी कि ब्रेकअप के साथ ही पैचअप भी हो गया।
इससे पहले एक बड़ा ब्रेकअप हुआ है सपा और बसपा के बीच। कहाँ गठबंधन हुआ था नये सपनों के साथ और कहाँ अब दोनों एक-दूसरे पर थू-थू कर रहे हैं। छोटे-छोटे ब्रेकअप तो आये दिन होते ही रहते हैं। कभी आप के नेता का तो कभी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का अपनी पार्टी से ब्रेकअप हो जाता है। जैसे आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया धारण कर लेती है वैसे ही नेता पुरानी पार्टी छोड़कर नई में शामिल हो जाते हैं।
कई प्रतिभावान नेता तो एक से दूसरी, दूसरी से तीसरी और फिर तीसरी से पहली में ऐसे आते-जाते रहे हैं जैसे सुबह की सैर को निकले हों। उनके बारे में कुछ पता ही नहीं चलता कि कब किससे ब्रेकअप कर लें और किससे पैचअप। चाय पीने निकले हैं अपनी पार्टी के दफ़्तर और लंच कर आते हैं दूसरी पार्टी में। ऐसे प्रतिभावानों के कारण ही ब्रेकअप शब्द की महिमा बढ़ी है।
हर पार्टी दूसरी में ब्रेकअप चाहती है। यानी चारों ओर ब्रेकअप की बहार है। पर आप पाठक ख़ुश न हों। ब्रेकअप आम जनता के नसीब में नहीं होता और हो जाए तो किसी को ख़बर तक नहीं होती। यह तो सेलेब्रिटीज़ का खेल है। आम आदमी के जीवन में पैचअप बड़ी मुश्किल से होता है और एक बार हो जाए तो फिर ‘जनम -जनम का साथ है’ गाते हुए निभाना पड़ता है।


इस ब्रेकअप पर एक गाना याद आ रहा है। नायिका बड़ी ख़ुश होकर गाती है ‘मेरे सैंया जी से आज मैंने ब्रेकअप कर लिया’, आज़ादी का ऐसा उल्लास सामने वाली पार्टी में भी दिखाई दिया और वो पार्टी -शॉर्टी की बात करने लगा। ऐसा म्युचुअल ब्रेकअप चुनावों के दौरान देखने का मिलता जब पार्टियों में ‘तूने मेरे दो तोड़े तो मैं तेरे चार तोड़ता हूँ’ की प्रतियोगिता होती है।
वैसे राजनीतिक ब्रेकअप के मामले में अपने हरियाणा के लालों का कोई जवाब नहीं रहा। गया लाल दिनभर में तीन बार ब्रेकअप करने का कमाल कर गए तो भजनलाल पूरी सरकार के साथ ब्रेकअप कर गए, सिर्फ झंडा बदला बाकी सब वही रहा। लाल के बाद यूपी के पाल थे, जगदम्बिका पाल। एक ब्रेकअप उत्तराखंड में हुआ जो उत्तरकांड नहीं बन पाया पर झारखंड में कामयाब रहा। ‘दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा’ हुए शत्रु भइया ने भाजपा से ब्रेकअप किया पर हर कोई नवजोत नहीं होता। यह ब्रेकअप की ही महिमा है कि हमें मीडिया से यह पता चलता रहता है कि किस खिलाड़ी का किस सिंगर के साथ या किस नायिका का किस डायरेक्टर के साथ कुछ चल रहा था और अब ब्रेकअप हो गया है। इससे हमारे सामान्य ज्ञान में वृद्धि होती है, ऐसा मीडिया का सोचना है। हमारा क्या सोचना है इसकी मीडिया को परवाह नहीं।
वैसे ब्रेकअप से याद आया कि मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज़ बड़ी चीज होती है। एक ख़बर सारे टीवी चैनलों के पास होती है और हर कोई उसे ब्रेक कर रहा होता है। मैं नादान पहले समझता था कि ब्रेकिंग न्यूज़ का मतलब सबसे पहले ख़बर देना पर अब समझ में आ गया है कि ब्रेकिंग न्यूज़ का मतलब ख़बर को अख़रोट की तरह तोड़ना। बाकी आपकी किस्मत है कि उसमें से कितनी गिरी निकलती है। कोई-कोई चैनल तो ख़बर को इतना तोड़ते हैं कि दर्शक टूट कर दूसरे चैनल पर चला जाता है। पर मुसाफ़िर जाएगा कहाँ, वहाँ भी वही ख़बर तोड़ी जा रही होती है। दर्शक उससे ब्रेकअप करके फिर पहले चैनल पर लौट आता है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं|

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