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मिजोरम

मिज़ोरम के डॉ. वी आर राल्ते का हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान

 

  • सुवालाल जांगू

 

हिन्दी दिवस के विशेष में मिज़ोरम के डॉ. वी आर राल्ते का हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान पर उनके साथ हुयी एक बातचीत के आधार पर यह लेख तैयार किया गया हैं |

डॉ. वी आर राल्ते: जन्म 13 सितंबर 1975 को हुआ |

शेक्षणिक योग्यता: पीएचडी (जीवन मूल्यों पर शोध )

व्यवसाय/वृति: शिक्षण

पद और कार्यालय: निर्देशक, विश्वव्यापी हिन्दी संचार केंद्र

भाषा ज्ञान: मिज़ो, हिन्दी, संस्कृत, असमी, बंगाली, नेपाली, भोजपुरी, इंग्लिश, और चाइनिज-मंदारिन

प्रकाशित कृतियाँ: 13 पुस्तकें, कई सारे लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, और 15 राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में पेपर प्रस्तुत किये गये |

संपादन: लुङ्ग्लौहतुई – मिज़ोरम विश्वविद्यालय 7वीं वार्षिक पत्रिका का हिन्दी संपादन, हिन्दी हीरक जयंती, मिज़ोरम हिन्दी स्वर्ण जयंती स्मारिका

अनुवाद: मिज़ोरम सरकार के द्वारा संसद में जमा किये गए अंग्रेजी में प्रस्तुत पुस्तक ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफ़िट’ का हिन्दी में ‘लाभ का पद’ नाम से अनुवाद, कवच (ओमफो), अशोक, धरती मेरा घर (पिआल्लेइ का रून) का हिन्दी से मिजो में अनुवाद, मिजो के विख्यात कहानी पुस्तक ‘बेइदोन्ना पिआह रम’ का हिन्दी में ‘विनाश के उस पार’ नाम से अनुवाद |

सम्मान और पुरस्कार: अखिल भारतीय हिन्दी संस्था संघ का ‘उत्कृष्ट हिन्दी सेवी’ सम्मान, अखिल महाराष्ट्र पत्रकार और पत्रलेखक संघ और भारतीय विकास अकादेमी का ‘ज्वेल ऑफ इंडिया’, पृड़े ऑफ इंडिया’ और ‘राष्ट्रीय एकात्मता फ़ेलोशिप’ आदि राष्ट्रीय सम्मान | डॉ. बी आर आम्बेडकर के ‘साहित्य रत्ना’, ‘उत्कृष्ट गायन’, ‘संगीत रत्न’, गुण गौरव समाज रत्न’ – इत्यादि पुरस्कार, इंदौर से अनोखा विश्वास प्रकाशन समूह का पुरस्कार, रोटरी इंटरनेशनल के ‘वोकेशनल एक्सेलेन्स अवार्ड’ से सम्मानित |

1- हिन्दी प्रचार को मिशन बनाने की प्रेरणा कैसे मिली ?

: ईश्वर का वरदान है। स्वयं से प्रेरणा मिली।

2- ऐसा करने में किस-किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा ?

: समस्याओं का सामना तो समाज के हिन्दीवालों से ही करना पड़ा, खुद तो कुछ करते नहीं, जो करते हैं प्रेरणा देने के वजाय रोकने का काम करते हैं।

3- हिन्दी के प्रचार में अब तक सबसे ज्यादा मददगार क्या रहा ?

: टीवी धारावाहिक।

4- मिशन की शुरुआत कैसी थी और अब कैसी स्थिति है संबंधित राज्य में ?

1966 के ‘मिज़ौरम जातीय आंदोलन’ के फलस्वरूप पहले हिन्दी को हमारे समुदाय शत्रुओं की भाषा समझते थे, अब जबकि हम भूमिपुत्र हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लग गए तो मित्रों की भाषा समझने लगे हैं।

5- हिन्दीभाषियों से क्या है अपेक्षा ? अपने मिशन के संदर्भ में ?

:हिन्दीभाषियों से यहीं अपेक्षा है कि कंधे से कंधा मिलाए हमारे साथ। परोपकार व स्नेह की भावना रखें।

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‘द टेलीग्राफ’ इंग्लिश समाचारपत्र द्वारा (29 दिसम्बर 2009 के वर्षांत विशेषांक) डॉ. राल्ते को ‘युवा क्रांतिकारी’ नाम से अभिनीत किया गया | डॉ. राल्ते पिछले 15 सालों से मिज़ोरम में हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार का काम कर रहे | हिन्दी भाषा के जरिए डॉ. राल्ते राष्ट्रीय एकता और मानवता के उन्नयन साधने में अग्रणी योगदान कर रहे हैं | मिज़ोरम में हिन्दी कर्मयोगी  और देश में एक डॉ. राल्ते को मिजो कर्मयोगी के तौर पर जाने जाते हैं | हिन्दी भाषा समाज और साहित्य में योगदान कर डॉ. राल्ते ने एक अन्यतम पद स्थापित कर लिया हैं |  डॉ. राल्ते को नॉर्थ-ईस्ट सन – इंग्लिश पाक्षिक पत्रिका ने (जनवरी 16-31 2007) ने “द मैन ऑफ वर्सेटाइलिटी, प्रिंस ऑफ हिन्दी (बहुमुखी व्यक्ति, हिन्दी सम्राट) से अलंकृत किया हैं | पूर्वोत्तर के हिन्दीतर भाषी प्रदेशों की विषम परिस्थितियों में और देश व विदेश में भी अपने स्वयं व्यय से हिन्दी के विजय ध्वज गाड़ने में सच्चा और नि:स्वार्थ त्यागमय प्रेम, सेवा और बलिदान से डॉ. राल्ते ने जन गण मन द्वारा ‘पूर्वोत्तर में हिन्दी सम्राट’ का यश प्राप्त किया हैं |

युनेस्को के तत्वाधान में वर्ल्ड पीस सेंतरे (अलान्दी), पुणे में 30 जनवरी से 2 फ़रवरी 2008 को आयोजित ‘विश्व शांति सम्मेलन (वर्ल्ड पीस कॉंग्रेस) में उपस्थित लगभग 5000 हजार देश-विदेश के युवाओं के सम्मुख अंग्रेजी में आलेख: ‘द होल वर्ल्ड इज वन फमिली’ (वसुधेव कुटुंबकम) प्रस्तुत करने और “वंदे मातरम” गीत प्रस्तुत करने पर इनके चाहने वालों ने “दिल का स्मार्ट, द किंग ऑफ होटर्स” कहने लगे | मिज़ोरम में भी लोग डॉ. राल्ते को इसी नाम से याद करते हैं | हर अच्छे व दूसरों के हित साधने में पीछे न मुड़ने वाले डॉ. राल्ते को मिज़ोरम सरकार द्वारा पंजीकृत “मिज़ोरम माध्यमिक विद्यालय हिन्दी अध्यापक संघ” ने “मिज़ोरम का ध्रुवतारा” सम्मान से नवाजे गये हैं |

डॉ. राल्ते को ‘हिन्दी सलाहकार समिति’ नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, अखिल भारतीय हिन्दी संस्था संघ के लाखों सदस्यों में से ‘प्रेक्षक’ के रूप में नियुक्त किया जाना उनकी “श्रेष्ठता का परिचायक” हैं | अखिल भारतीय हिन्दी संस्था संघ ने 16-18 नवंबर 2007 में मुंबई में आयोजित ‘कार्य कर्ता शिविर’ में “युवाओं के मध्य हिन्दी के प्रचार माध्यम से युवाओं को विकास की ओर ले जाने में उत्तम कार्यकर्ता हेतु” डॉ. राल्ते को “उत्कृष्ट हिन्दी सेवा” सम्मान प्रदान किया | 14-20 सितंबर 2009 को पूर्वोत्तर में विश्वव्यापक हिन्दी संचार केंद्र (यूनिवर्सल हिन्दी कम्युनिकेशन सेंटर), आइज़ोल मिज़ोरम द्वारा आयोजित “विश्वव्यापक सांप्रदायिक सद्भाव महोत्सव” डॉ. राल्ते के परोक्ष और सार्थक प्रयास से सफल हो पाया था|

राल्ते जी, सांस्कृतिक मांग के अनुसार सोसायटी पंजीकृत कई संस्थाओं के संस्थापक रहे हैं | मिज़ोरम साहित्य अकादमी के संस्थापक और विख्यात पेराडाइज़ हिन्दी स्कूल और संत वलेंटाइन हिन्दी कॉलेज शैक्षणिक संस्थाओं के संस्थापक हैं | इन के अध्ययन केन्द्रों के माध्यम से मिज़ोरम की नयी पीढ़ी के नवयुवाओं को ‘भारतीय संस्कृति और हिन्दी सीखने’ में प्रेरणा मिलती है | उनको एकसूत्र में बांधकर देश के हित में उचित कदम बढ़ाने हेतु उन में ‘जोश व होश’ दोनों भर देने में  डॉ. राल्ते ने काही कसर नही छोड़ी हैं | मिज़ोरम सरकार ने 2002 में डॉ. राल्ते को ‘विश्वव्यापक सांप्रदायिक सद्भावना के राजदूत सम्मान’ से सम्मानित किया हैं | विक्रमशीला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर (बिहार) द्वारा 13 दिसम्बर 2013 को सारस्वत सम्मान समारोह में मानद उपाधि “विद्यासागर’ से सम्मानित हुये हैं |

लेखक मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल में राजनीति पढ़ाते हैं|
सम्पर्क- +919436768637, sljangu18@gmail.com
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