Tag: nawal kishor kumar

मैं कहता आँखन देखी

हिन्दू राष्ट्र में तब्दील होता भारत

 

  •  नवल किशोर कुमार

 

बहुत पुरानी कहावत है। जैसा राजा होता है वैसी ही प्रजा भी होती है। मतलब यह कि यदि राजा सदाचारी हो, ईमानदार हो, जनता का ध्यान रखने वाला हो तब प्रजा भी वैसी ही होती है। वह भी राज्य के विकास में अपनी भूमिका निभाती है। समाज में अमन कायम रखती है। इसके विपरीत यदि राजा सत्तालोलुप हो और हर कीमत पर सत्ता को बनाए रखने का आकांक्षी हो तो जनता पर उसका असर पड़ता है।

यह असर कितना प्रतिकुल होगा इसका अनुमान इसीसे लगाया जा सकता है कि आज देश में बड़ी संख्या में आरएसएस समर्थक हिन्दू सावरकर को भारत का महान पुरूष मानने लगे हैं। इसमें नीतिन गडकरी जैसे लोग शामिल हैं जिन्होंने गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या को गांधी वध की संज्ञा दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि इस वध में सावरकर निर्दोष साबित हुए थे। अब जब केंद्र का एक वरिष्ठ मंत्री ऐसी बात कर रहा है तो इसका असर देश पर पड़ेगा ही। जो गोडसे और सावरकर को क्रमश: गांधी का हत्यारा और गांधी की हत्या का षडयंत्रकारी मानते हैं, उन्हें या तो मुसलमानों का पिट्ठू कहा जा रहा है या फिर देशद्रोही की संज्ञा दी जा रही है।

असलियत यही है कि भारत की सरजमीं पर कुछ ऐसा हो रहा है जिसे किसी भी हाल में सुशासन अथवा अच्छा शासन नहीं माना जा सकता है। वित्तीय स्थिति डांवाडोल है। समाज में धर्म के नाम पर भेदभाव इतना बढ़ गया है कि अब हर घटना को मजहब के आधार पर देखा जाने लगा है। मसलन बीते शुक्रवार को लखनऊ में कमलेश तिवारी नामक एक व्यक्ति की हत्या उसके दफ्तर में घुसकर कर दी गयी। पुलिस ने इस मामले में गुजरात के सूरत से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये तीनों वे नहीं हैं जिन्होंने हत्या की वारदात को अंजाम दिया बल्कि षडयंत्रकारी हैं। हत्या के कारणों को लेकर पुलिस का कहना है कि चूंकि कमलेश तिवारी ने 22016 में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था  और उसके खिलाफ बिजनौर (उत्तर प्रदेश) के एक व्यक्ति कहा था कि वह तिवारी का सर कलम करने वाले को 51 लाख रुपए का इनाम देगा।

Image result for kamlesh tiwari जबकि मृतक कमलेश तिवारी की मां कुसुम तिवारी का कहना है कि यह हिंदू-मुस्लिम का मामला नहीं है। उनका आरोप है कि शिवप्रकाश गुप्ता ने मंदिर पर कब्जा जमाने के लिए उनके बेटे को मरवा दिया है। अब चूंकि उत्तर प्रदेश में हिंदूवादी पार्टी की सरकार है तो कुसुम तिवारी के आरोपों पर जांच का सवाल ही नहीं उठता है। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक बार भी शिवप्रकाश गुप्ता से पूछताछ तक नहीं की है।

इस घटना को छोड़ भी दें तो जो सबसे बड़ा संकट है  वह सरकार के साख का। दिन पर दिन सरकार की साख तो गिर ही रही है, न्यायपालिका से लेकर भारतीय सेना तक की विश्वसनीयता संकट में है। मसलन,  भारतीय सेना के मुताबिक कल उसने पाक अधिकृत कश्मीर में गोलाबारी कर 5-10 पाकिस्तान सैनिकों को मार डाला है। साथ ही आधा दर्जन आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया गया है। बिहार में कांग्रेस के नेता अखिलेश सिंह ने आरोप लगाया है कि चूंकि आज महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदान होने हैं, इसलिए भारतीय सेना ने यह कारनामा दिखाया है।

यह विचार अकेले केवल एक अखिलेश सिंह का नहीं है। जिस तरह से लोकसभा चुनाव के ठीक पहले बालाकोट हमला किया गया और अब हरियाणा व महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के एक दिन पहले यह हमला किया गया है, बड़ी संख्या में लोग यह सवाल उठा रहे हैं। लोगों का मानना है कि जब-जब अब देश में चुनाव होंगे, सरकार पाकिस्तान पर हमला बोलेगी।

सोचकर देखिए तो कितना खतरनाक है यह अविश्वास। अब भारत की जनता किस पर विश्वास करे। न्यायपालिका की पक्षधरता हमेशा से दोधारी तलवार का सामना करती रही है। इसकी एक वजह यह भी कि न्यायपालिका में समाज के सभी तबकों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं है। कॉलेजियम सिस्टम के कारण पहले से चंद घरानों का न्यायपालिका पर कब्जा तो था ही। अब केंद्र सरकार सीधे इस मामले में हस्तक्षेप कर रही है। अभी हाल ही में केंद्र सरकार में मंत्री ने खुलेआम कहा कि देश में राष्ट्रपति कौन होगा, जब इसका फैसला प्रधानमंत्री करते हैं तो देश का मुख्य न्यायाधीश कौन होगा, इसका फैसला यदि वे लेते हैं तो इसमें गलत क्या है।

Image result for India turning into a Hindu nation

राजनीति और देश से इतर यदि समाज में मजहबीउन्माद की बात करें तो यह सबसे खतरनाक स्थिति है। देश की राजधानी दिल्ली में हिन्दू धर्म को मानने वाले मकान मालिक मुसलमानों को कमरा किराए पर नहीं देते। कमोबेश यही हालत देश के अन्य शहरों में भी है। दिल्ली में तो इन दिनों एक और बात देखी जा रही है। इंसान को धर्म के नाम पर बांटने का यह मंजर मांस और चिकेन की दुकानों पर आसानी से देखा जा सकता है। हिन्दू दुकानदान अपनी दुकान के बोर्ड पर ‘झटका’ शब्द लिखते हैं ताकि खरीदने वाले को यह पता चले कि वह जो मांस खरीद रहा है वह किसी मुसलमान के हाथ का छुआ नहीं है और धार्मिक रूप से पवित्र है। दूसरी ओर मुसलमान दुकानदार ‘हलाल’ शब्द का प्रयोग करते हैं। मानों उनके यहां मिलने वाले मांस के उपयोग से खाने वाले को मरने के बाद जन्नत नसीब होना सुनिश्चित है।

बहरहाल, कहना अतिश्योक्ति नहीं कि देश में हवा बदल गयी है। इस हवा से विविधता में एकता वाले इस देश की गंगा-जमुनी संस्कृति धीरे-धीरे दम तोड़ रही है। इस संभावनाा से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इसका नुकसान भारत को बहुत महंगा पड़ेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि देश के हुक्मरान इस तथ्य को समझ लें कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। वह बैर को हवा देना बंद कर दे।

लेखक फॉरवर्ड प्रेस, दिल्ली के सम्पादक (हिन्दी) हैं|

सम्पर्क-  nawal4socialjustice@gmail.com

.

18Oct
मैं कहता आँखन देखी

राजीव धवन के समर्थन में

  नवल किशोर कुमार   इन दिनों भारत के उन्मादी ऊंची जातियों के निशाने पर हैं...

17Oct
मैं कहता आँखन देखी

अयोध्या का सवाल और भारतीय मीडिया का रक्त चरित्र

   नवल किशोर कुमार   एक बार फिर इतिहास लिखा जा रहा है। इस बार इतिहास कोई...

16Oct
Uncategorized

चार साल में भुखमरी से 56 की मौत

  नवल किशोर कुमार   यूनिसेफ ने आंकड़ा जारी किया है। इसके मुताबिक भारत में हर...

14Oct
मैं कहता आँखन देखी

दास्तां एक और शहीद की

   नवल किशोर कुमार   उसका नाम जितेंद्र मरावी था। प्यार से उसके घर वाले और...