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शख्सियतसिनेमासिनेमास्तम्भ

जन्मदिन विशेष : ‘बस एक बार मेरा कहा मान लीजिए’…

sablog.in डेस्क – वो बॉलीवुड के लिए आज भी बिंदास हैं, क्योंकि वो आज भी उतनी ही हसीन और जवान हैं जितनी आज से तीस साल पहले थीं। जी हां, बात हो रही है बॉलीवुड की उमराव जान की, जिनकी जिंदगानी आज भी एक पहेली बनी हुई है। जी हां, उमराव जान कही जाने वाली बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री रेखा की जिंदगी किसी पहेली से कम नहीं है। जिसने भी इसे जितना समझने की कोशिश की, वो उतना ही उलझता गया।

2006 में रिलीज हुई ‘परिणीता‘ फिल्म के इस गाने को पढ़िए, जैसी ही रेखा की जीवनगाथा है। पहेली, कैसी पहेली है ये जिंदगानी… दरअसल, आज रेखा के बारे में कुछ भी कहना बिलकुल बेमानी है, क्योंकि अपनी साधना के बलबूते उन्होंने आज भी खुद को मेंटेन कर रखा है। ये तो आप जानते ही हैं। क्योंकि, जब कभी वो किसी अवार्ड फंक्शन में जाती हैं तो लोगों की तो छोड़िए, कैमरे भी उन्हें ही कैद करने उनकी ओर दौड़ जाते हैं। और, रेखा यूं ही इतनी खूबसूरत नहीं बनीं हैं, बल्कि इसके पीछे है उनकी मेहनत और उनका परहेज, जो आज की उम्र में भी उन्हें बला की खूबसूरत बनाए हुए है। रेखा रोजाना दो घंटे से ज्यादा योग करती हैं, और खानपान का भी पूरा ध्यान रखती हैं। इसलिए तो वे आज जितनी फिट हैं, उतनी आज के समय की अभिनेत्रियों भी नहीं हैं।

रेखा ने जब बॉलीवुड की दुनिया में पहला कदम रखा था, तो उनकी उम्र करीब 13 साल थी। लेकिन, एक बार जो रेखा ने शुरुआत की, उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। जीवन में कई मोड़ आए, उतार-चढ़ाव आए, लेकिन बेलौस रेखा उन्हें पार करती हुई आगे बढ़ती गई। एक समय था जब बॉलीवुड में उनकी तूती बोलती थी। कमर तक लटकी चोटी और ठुमके का निराला अंदाज। इस रेखा को आप एकबारगी पहचान नहीं पाएंगे।

लेकिन इससे पहले कि आप कुछ और सोचने लगें, हम आपको बता दें कि ये रेखा की पहली फिल्म थी और इस फिल्म के समय रेखा की उम्र महज 13 साल थी, तो जाहिर है पहचान में फर्क तो आएगा ही, लेकिन खेतों में ठुमके लगाती रेखा ने उन दिनों फिल्म देखने वालों के होश उड़ा दिये थे। जब आंखें नशीली हों तो दर्शकों पर कुछ तो असर पड़ेगा ही… इस फिल्म ने बॉलीवुड में रेखा की धमाकेदार एंट्री कराई और सुपरहिट साबित हुई।

फिल्म ‘सावन भादो‘ से रेखा ने डेब्यू किया था और जब शुरुआत धमाकेदार हो तो लोग अभिनय तो सराहते ही। रेखा रातों रात करोड़ों लोगों की फेवरेट स्टार बन गई। लेकिन जैसा कि पहले ही कहा गया कि रेखा की जिंदगी पहेली ही रही और ये कभी सुलझ नहीं सकी। ‘सावन भादो‘ के बाद भी रेखा ने कई फिल्में दी। 1972 में रेखा खेतों से निकल कर सड़क पर आ गई। वो भी एक खुली कार में सवार होकर, ‘अलबेला‘ को रोकने के लिए, जो उसका दिल तोड़कर जा रहा था। इसमें रेखा पर फिल्माया गया गाना खूब चला।

 

इसके अलावा रेखा ने ‘गोरा और काला’, ‘कहानी किस्मत की’, ‘नमक हराम’, ‘प्राण जाए पर वचन ना जाए’ और ‘धर्मात्मा’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। लेकिन ये दौर नायकों का था और जैसे नायिकाओं की किस्मत सो गयी थी, ऐसा ही रेखा के साथ भी हुआ, फिल्मों की कामयाबी का श्रेय फिल्म के अभिनेता ले गये। और वे अपना दुख जताने के अलावा और कुछ ना कर सकीं। आज भी वो बॉलीवुड में सक्रिय हैं। और, उन्होंने स्टारडम की दुनिया में जो रेखा खींच दी है, उसकी बराबरी करना फिलहाल किसी के बूते की बात नहीं है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

राजन अग्रवाल
(लेखक पत्रकार हैं. )
rajan.journalist@gmail.com

26Sep
शख्सियतसिनेमासिनेमास्तम्भ

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