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मोदी नीति के डिजाइन में दिक्कत है!

हाथ उठाइये मित्रों… अच्छे दिन आए की नहीं आए। मोदी…मोदी…! ये बीजेपी के भगवान और उनके भक्तों का जुमला है। आपसे पूछता हूं 4 साल में क्या आपके अच्छे दिन आए? क्या नोटबंदी से आपको फायदा हुआ ? क्या जीएसटी अभी तक आपको समझ आई ? क्या केंद्र सरकार की योजनाओं का आपको फायदा मिल रहा है ? फायदा छोड़िए क्या आपको केंद्र के द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी है? पूरी भी छोड़िये अधूरी ही जानकारी है ? उम्मीद करता हूं नहीं होगी।


4 साल के मोदी राज में क्या बदला ?
लेकिन इतना तो आप भी जानते होंगे की आज भी सेना के जवान शहीद हो रहे हैं। आज भी पत्थरबाजी जारी है। आज भी धारा 370 नहीं हटी। आज भी रामलला का मंदिर नहीं बना। आज भी देश में जल विवादों का समाधान नहीं हुआ। आज भी बेरोजगारी की लंबी लिस्ट है। आज भी ट्रेन समय से नहीं चल रही है। आज भी दफ्तरों में अधिकारी आपसे चक्कर कटवाते हैं। आज रेप के सबसे ज्यादा आंकड़ें हैं। रेप के डर से आज बेटियां स्कूल जाना छोड़ रही है उदाहरण कई हैं चाहिए तो मैं आपको सबूत भी दे सकता हूं।

क्या बदला इन चार सालों में ? राजनीति का तरीका बदला। वोटों के ध्रूवीकरण का जातीय समीकरण अब दंगों के रूप में दिखाई देता है। कोई भी एक ऐसी घटना बताइये जिसमें बीजेपी के नेता का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हाथ ना हो। मैनेजमेंट का सबसे बेहतर तरीका आज सत्तासीन पार्टी के पास है। और इस मैनेजमेंट का सबसे बेहतर साधन सोशल मीडिया है जिसके जरिए ये आपके दिमाग को हैक कर रहे हैं। आप फेसबुक चलाते हैं, ट्विटर, वॉट्सएप, इंस्टा, या कोई और साइट्स इन सोशल इंजिनियरिंग के माध्यम से आपको मैनेज किया जा रहा है। मेरे ख्याल से इन चार सालों में बीजेपी की ये बड़ी उपलब्धि रही है।


मिशन 2109 पर मोदी ब्रिगेड !
ये जनता को समझना पड़ेगा की आखिर उनकी बुनियादी जरूरतें कैसे पूरी हो। किस नेता को चुने किस पार्टी को वोट दें। सरकार अपनी जिम्मेदारी ना समझें तो जनता को जिम्मेदार होना जरूरी है। क्योंकि 2019 में फिर ये नेता आपके पास पहुंचेंगे और आपसे वोट की अपील करेंगे। विकास का राग अलापेंगे और फिर आपको अच्छे दिन के सपने दिखाएंगे। और इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है।

शाह का ‘मंत्र’, 48 साल बनाम 48 महीने !
दरअसल दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने पार्टी पदाधिकारियों को मिशन 2019 का मंत्र फूंक चुकें हैं। और इस बार शिगूफा छोड़ा गया है। 48 साल बनाम 48 महीने। आप अगर समझदार हैं तो सोचिए कोई भी सरकार 48 महीने में 48 साल की खराब चीजों को कैसे ठीक कर सकती है। ठीक करना छोड़िये क्या चार सालों की समीक्षा सरकार 48 दिनों में कर पाएगी वो भी अपने कामों की। अगर हां तो सरकार को इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी लेकिन वो 48 सालों से तुलना में जुटी है।आप समझ सकते हैं।

दिल्ली में हुए इस हाईलेवल मीटिंग में काम का लेखा जोखा मांगा गया है। क्या आपको लगता है कि कोई भी पदाधिकारी रिपोर्ट में किसी भी क्षेत्र के बारे में कमी बताएगा। बिल्कुल नहीं क्योंकि अगर कमी बताया तो फटकार लगेगी हो सकता है तलवे चाटू ना हो तो उसे निकाला भी जा सकता है इसलिए नहीं की काम क्यों नहीं हुआ बल्कि इसलिए की रिपोर्ट में काम ओके क्यों नहीं दिखाया ये विडंबना आज हमारी और आपकी। सरकार की इसमें कोई गलती नहीं क्योंकि सरकार के भक्त हम बने हुए है।

मुद्दों से भटकी सरकार, कांग्रेस मुक्त करना लक्ष्य
खैर बीजेपी का मकसद है कांग्रेस मुक्त भारत। क्या होगा इससे फायदा ये बताईये। क्या इससे जनसरोकार से जुड़े मसले हल होंगे। हालांकि इनका मकसद कितना पूरा होगा ये तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन भक्त की हाथ जोड़े जयकारा लगाते रहे तो कांग्रेस मुक्त भारत हो ना हो आप लुट जाएंगे ये तय है। क्योंकि आप भी जानते होंगे की बेहतर सरकार बिना मजबूत विपक्ष के नहीं हो सकती है।

किसानों की किन योजनाओं का गीत गाएगी सरकार ?
चलिए थोड़ा आगे। बीजेपी की इस बैठक में मोदी सरकार की कृषि उपलब्धिया प्रचार प्रसार करने के लिए गुरुग्राम में 2 दिनों तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। और वो कार्यकर्ता क्या करेंगे आपके पास जाकर आपको बताएंगे की खेती के लिए सरकार ने ये किया वो किया। यहां तक की आपके पास भी नहीं जाएंगे सोशल मीडिया का जिन्न उनके पास है जिसके जरिए वो तुरंत आप तक सरकार का विकास पैगाम पहुंचाएंगे। और खुश होंगे की वाह किसानों के अच्छे दिन आ गए।


किसानों के कितने अच्छे दिन इन चार सालों की तस्वीरें आपने भी देखी होगी। किसानों के कौन सी योजना लेकर सरकार आई जिससे उन्हें फायदा हुआ हो। कृषि बीमा योजना। आपको बतादें की आज भी इसके जरिए जो मुआवजे दिये जाते हैं उसका चेक 2 रुपये, 100 रुपये का होता है। क्या किसी किसान के मेहनत का मुआवजा बस इतनी ही होनी चाहिए। कितने किसान इन चार सालों में मरे इसका आंकड़ा ना तो सरकार आपको बताएगी ना ही उनका सोशल इंजिनियरिंग और ना ही वो कार्यकर्ता जो चाय पीने आपके दरवाजे पर सुबह शाम आ जाते होंगे। कौन सा ऐसा राज्य है जहां का किसान आज खुशहाल है। कहीं नहीं उदाहरण के तौर पर पंजाब और हरियाणा को ले लीजिए कृषि के लिहाज से इन दोनों राज्यों को सबसे खुशहाल माना जाता है लेकिन क्या इन दोनों राज्यों के किसान खुशहाल हैं। बिल्कुल नहीं पंजाब में तो सैकड़ों किसान मर गए और हरियाणा में भी किसानों पर मुसीबते हैं।

लक्ष्य अंत्योदय का हाल जानते हैं आप ?
जानकारी के मुताबिक अमित शाह ने लक्ष्य अंत्योदय, प्रण अंत्योदय, पथ अंत्योदय का मूल मंत्री कार्यकर्ताओं के कान में फूंका है। दरअसल अंत्योदय योजना मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। जिसके तहत गरीबों को सस्ते राशन दिये जाते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसकी जमीनी हकीकत क्या है इसकी जानकारी गांव के उन लोगों को मालूम है जिन्हें अंत्योदय का लाभ लेने के लिए कई दिनों तक चक्कर लगवाया जाता है। अन्न कम दिया जाता है।

और आपके जरूरी है ये जानना कि भूख से झारखंड के जलड़ेगा प्रखंड में 11 साल की बेटी की मौत हो गई दिन था 28 सितंबर 2017 । आधार से राशन कार्ड लिंक नहीं होने के कारण परिवार को राशन नहीं दिया गया था। लेकिन सरकार ने इस मौत की वजह बीमारी बता दी। परिवार वाले चीखते रहे की मौत भूख से हुई लेकिन मानेगा कौन, आप मानेंगे क्या ? 7 नवंबर 2015 को यूपी के बारा तहसील के गीज पहाड़ी में मुसहर जाति के तोताराम और उसकी सात साल की बेटी भूख से मर गई। वहां भी अधिकारियों ने मामले की लीपापोती कर दी। कई उदाहरण है, अब लक्ष्य अंत्योदय, प्रण अंत्योदय, पथ अंत्योदय का गुणगान सरकार करेगी।

खैर दिक्कत नीतियों की उस डिजाइन में है लोगों को दरकिनार कर उन्हें मौत के मूंह में धकेलते हैं। चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी या कोई अन्य पार्टियां। किसी के डिजाइन में जनता सर्वोपरि नहीं है। बस देश के नाम पर गंदी राजनीति। अब 2019 में आम चुनाव हैं समझदारी तय करनी पड़ेगी।

 

सोनू झा

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