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मुद्दा

हिन्दी हिंदुस्तान की पहचान और गौरव 

 

  • लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”

 

हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं रंग रूप भेष भाषा चाहे अनेक हैं ,,, वास्तव में यह दोहा भारत पर सटीक बैठती है और अपनी अर्थ में हमें और भारत का गौरव की गुण गान करते हैं।

भारत अनेकता में एकता का देश है। यहाँ अलग-अलग धर्म अलग-अलग जाति, सम्प्रदाय भेष-भूषा  रंग रूप के लोग निवासरत हैं ।पर हमारी राष्ट्रीय एकता का घोतक हमारी हिन्दी भाषा है जो हमारी राष्ट्रीय एकता की भाषा है और गौरव है। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद संविधान सभा द्वारा 14 सितम्बर 1949 को सर्वसम्मति से हिन्दी को राजभाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया गया था इस ऐतिहासिक प्रसंग को याद करने और राष्ट्र भाषा के विकास के लिए संकल्प लेने के उद्देश्य से हर वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। आज वर्तमान में हिन्दी की बात करें तो हिन्दी को आजादी के 70 वर्ष बाद भी जो सम्मान मिलना चाहिए क्या मिला? आज भी लोग चाहे वह अमीर हो या गरीब हर माँ बाप की तमन्ना होती है कि उनका बच्चा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े ।इस तरह की सोंच और आपा धपी में लोग आगे बढ़ रहे हैं स्कूल में बच्चा न तो अंग्रेजी सही सिख पा राह है न हिन्दी। आज भी सदन में अंग्रेजी से भाषण और कोर्ट में अंग्रेजी का बोल बाला है। बैंकों में लिखा रहता है कि हम हिन्दी में स्वगत करते है पर एक बी ए  पास भी अपनी पास बुक खुलवाने जाता है तो उसे अंग्रेजी का फार्म पकड़ा दिया जाता है और वह फार्म देख अवाक रह जाता है इधर उधर झांकने लगता है ऐसा क्यों? हमारी छत्तीसगढ़ में अंग्रेजी में बहुत कम लोग फार्म भर पाते हैं यहाँ तक कि मैं दूसरे व्यक्ति की क्यो बात करूँ अंग्रेजी तो मुझे भी नहीं आती कितना मुश्किल होता है पर अंग्रेजी भाषी पर भी हमारी हिन्दी भारी होती है। हिन्दी को सरल बनाए रखने के लिए जो कवि, साहित्यकार, लेखक, नाटककार, पत्रकार काम रहे हैं वह बहुत सुखद है। वही हिन्दी फिल्म भी अपनी कहानी डॉयलॉग से जन जन तक पहुंच रही है बड़े बड़े शहर में हिन्दी पर सम्मेलन होता है पर गांव और छोटे छोटे कस्बे इन सम्मेलनों से दूर हो जाते हैं। हमारे बच्चे स्कूलों में हिन्दी माध्यम में पढ़ते हैं पर पूर्ण हिन्दी भाषी नहीं बन पाते बोल चाल की भाषा में हिन्दी का प्रयोग नहीं कर पाते जिस स्कूल में उन्हें हिन्दी पर तालीम मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाता और हिन्दी से दूर हो जाते हैं आज स्कूलों में हिन्दी दिवस पर शिक्षक बात तक नहीं करते और वह दिन भी याद नहीं कराते बच्चों में हिन्दी के प्रति उत्साह ,उमंग जगाने की जरूरत है। कॉलेज के विद्यर्थियों को अगर आप कभी पुंछ बैठेंगे की हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है या क्यों मनाना चाहिए उत्तर के लिए परसों लग जायेगा। यह हाल आज देखने को मिलता है। हमारी सजगता ही हमारी भाषा को पहचान दिला सकती है। अब हमें जागने की जरूरत है अपनी गौरव को पहचाने की जरूरत है।

 

युवा साहित्यकार पत्रकार

सह सम्पादक छत्तीसगढ़ महिमा हिन्दी मासिक पत्रिका रायपुर

सम्पर्क- +919752319395, shahil.goldy@gmail.com

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