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मुद्दासामयिक

शर्म है तो गंगा में स्नान मत कीजिए! पवित्र गंगा में शर्मिंदगी की डुबकी!

 

  • काजल ठाकुर 

 

महिलाओं को धर्मस्थल नहीं जाना चाहिए
महिलाओं को धर्मस्थल नहीं जाना चाहिए, धर्मस्थल पर जाने का हक सिर्फ पुरुषों को है…जाहिर सी बात है कि ये सुनकर हर किसी के दिमाग में एक सवाल जरुर उठ रहा होगा…सवाल ये कि महिलाओं को धर्मस्थल क्यों नहीं जाना चाहिए…
इस बात का जवाबा भी आपको मिलेगा लेकिन उससे पहले थोड़ा इतिहास को याद कर लेते हैं…एक समय था जब हमारा देश पुरुष प्रधान था, सिर्फ पुरुषों की चलती थी महिलाओं के हक को तवज्जों नहीं दी जाती थी या यूं कहें कि महिलाओं को उनको अधिकारों से लेकर सम्मान तक से वंचित रखा जाता था…धार्मिक स्थलों पर सिर्फ पुरुष ही जाते थे और पवित्र नदियों में स्नान भी पुरुष ही करते थे…कुछ धार्मिक स्थल तो ऐसे थे जिनपर महिलाएं का जाना पूर्णता वर्जित था…जैसे जैसे समय बदला, सोच बदली, रहन- सहन बदला, वैसे वैसे महिलाएं को उनके अधिकार भी मिलने लगे, सम्मान भी, और आजादी भी…ऐसा लगने लगा था कि खुलकर सांस लेने का हक मिला तो सारे हक मिल गए लेकिन अफसोस ये नारी की गलतफहमी थी…वो इसलिए क्योंकि आज भी नारी तमाम हकों से वंचित है, अगर मिल भी रहे हैं तो छीनकर या फिर बिना सम्मान के…


साफ शब्दों में कहूं तो आज भी महिलाएं इस भेदभाव का शिकार लगभग हर धर्मस्थल पर होती हैं…जिसकी सबसे बड़ी बानगी तो हरिद्वार में बह रही पवित्र गंगा नदी में देखने को मिलती है…गंगा को हमारे देश में सबसे बड़ी नदी माना जाता है और सबसे पवित्र भी…मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं..और इसी मान्यता को मानते हुए लोग दूर- दूर से पवित्र गंगा में डुबकी लगाने जाते हैं…इन भक्तों में सिर्फ पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी बराबर होती हैं…मन में श्रद्दा का भाव लिए महिलाएं हरिद्वार पहुंचती हैं और पवित्र गंगा में स्नान करने को उत्साहित होती हैं…लेकिन पवित्र गंगा में स्नान करने के बाद हर महिला को बड़ी शर्म से एक समस्या का सामना करना पड़ता है…क्योंकि वहां पर कपड़े बदलने के लिए कोई सुरक्षित या बंद स्थान नहीं है…जिससे वो खुद को असहज महसूस करती हैं उसका असहजता का अंदाजा मुझे इसलिए क्योंकि मैंने इस दृश्य को अपनी आंखों से देखा है और इस समस्या को देखकर तमाम सवाल उसी समय मेरे जहन में अपने आप उठ रहे थे ? क्या आज भी हमारा देश पुरुष प्रधान है ? क्या आज भी महिलाओं को धर्मस्थल पर नहीं जाना चाहिए ? क्या पवित्र नदियों में स्नान करने का हक आज भी सिर्फ पुरुषों को है ? क्या आज भी महिलाओं को सम्मान छीनने की जरुरत है और क्या आज भी महिलाएं पुरुषों की नजरों में मात्र एक वस्तु हैं?


आज भले ही महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं हों लेकिन लज्जा आज भी महिला का गहना है जिसका सम्मान पुरुषों को करना चाहिए…मेरा धर्म महिला का सम्मान, हर जननी को मेरा सलाम ये लाइने सिर्फ गाड़ियों, दीवारों या फिर पोस्टरों में लिखने भर से महिलाओं का सम्मान नहीं होता और ना ही सोशल मीडिया पर महिला सम्मान की वीडियो वायरल करने से…अगर इतने भर से काम हो जाता तो आज गंगा किनारे ये बनगी देखने को नहीं मिलती…याद रखिए वो महिला आपकी मां भी हो सकती है, पत्नि भी, बहन भी या फिर कोई मित्र भी…
जब इस समस्या को देखा तो मैंने तभी सोचा था कि आप सबको इस बारे में बताऊंगी…आप में से काफी लोगो तो इस सच्चाई को जानते भी होंगे क्योंकि ये किसी से छुपी नहीं है…मैं लिख तो गंगा नदी पर रही थी लेकिन दुर्गति देखकर नमामि गंगे परियोजना की भी याद या गई…मोदी सरकार ने बड़े जोर- शोर के साथ इस परियोजना की शुरुआत की थी…और दावा किया था कि गंगा साफ हो जाएगी…गंगा तो आज तक साफ हुई नहीं और कोई उम्मीद भी नहीं है लेकिन सरकार से इतनी जरुर है कि अगर गंगा की सफाई नहीं हो पा रही तो उस गंदे पानी में स्नान करने वाली महिलाओं की समस्याओं को हल करने का बीड़ा ही उठा लीजिए…बीड़ा मैंने इसलिए कहा क्योंकि इस काम को करने में एक महीना भी नहीं लगेगा लेकिन सरकार ने इसकी शुरुआत की तो पहले तो ऐलान होगा, फिर विज्ञापन चलाए जाएंगे, टीवी पर प्रचार होगा… तब कहीं जाकर ये बीड़ा उठेगा…क्योंकि गंगा को साफ करना 0सरकार का महज चुनावी एजेंडा है…दरअसल सच्चाई तो ये है कि गंगा साफ हो या ना हो लोगों की आस्था कम होने वाली नहीं है…
लेखिका के अपने विचार हैं

न्यूज चैनल में एंकर के रूप में कार्यरत हैं|

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