चर्चा में

जेल की सींखचों में स्वामी

 

  • शिवाशंकर पाण्डेय

 

जनप्रतिनिधि, माननीय का दर्जा और शरीर पर धर्म का प्रतीक गेरूआ पहनावा। एक ऐसा शख्स कि नाम के आगे स्वामी शब्द अलंकृत होता था। अब वो जेल में कुकर्मों की सजा भोग रहा है। कानून सजा दे ही रहा है, और शायद कुदरत भी माफी देना नहीं चाहती। जेल में भी वह बार-बार बीमार हो रहा है। यह किसी को भी हैरान कर सकता है कि देश का पूर्व गृह राज्य मंत्री और संन्यासी से स्वामी बने इस शख्स पर छात्रा से नग्नावस्था में तेल लगवाने और दुष्कर्म तक के गंदे आरोप हैं। एसआइटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) की जांच में इसे दोषी पाया गया है। एसआइटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने 20 सितम्बर को मीडिया से कहा कि जांच में सभी वीडियो क्लिप की सत्यता प्रमाणित होने व साक्ष्यों के मिलान के बाद ही चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर बाकायदे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। खुद के अपराध स्वीकारने और सुबूत देखने के बाद न्यायालय ने उनको जेल भेजा है। भाजपा के टिकट पर चार बार चुनाव लड़े और तीन बार सांसद रहे। सन् 2003 में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री का दायित्व। 19 जनवरी 1986 को रामजन्म भूमि आंदोलन के संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संयोजक बने। वक्त का फेर कि राजनीति और धर्म का नामी गिरामी चेहरा पुलिस हिरासत के बाद दुष्कर्म के आरोप में जेल के अंदर।

दरअसल, स्वामी चिन्मयानंद के कॉलेज में ही रहकर कानून की पढ़ाई करने वाली एक छात्रा ने नौ सितम्बर को स्वामी पर दुष्कर्म के आरोप लगाया। छात्रा ने नग्न होकर तेल लगवाने, अश्लील बातें करने वाले कई वीडियो सार्वजनिक किए थे। यह भी दावा किया कि स्वामी चिन्मयानंद कई छात्राओं की अस्मत से खिलवाड़ करके उनकी जिंदगी बर्बाद कर चुका है। आरोप लगाने वाली छात्रा इस बीच अचानक गायब हो गयी। आरोपी छात्रा के पिता ने 27 अगस्त को शाहजहांपुर की चैक कोतवाली में लड़की के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराया तो मामले ने तूल पकड़ लिया। मामले में एक मोड़ और आया, जब आरोप लगाने वाली छात्रा पुरूष मित्र के साथ 30 अगस्त को राजस्थान के होटल से बरामद कर ली गयी। मामला हाई प्रोफाइल से जुड़ा होने तथा तेज हंगामा के चलते सुग्रीमकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले की जांच एसआइटी को सौंपा। 30 अगस्त को राजस्थान के होटल में पुरूष ‘मित्र’ के साथ बरामद छात्रा ने खुद के दिल्ली में भी इसी मित्र के साथ छिपे होने की बात स्वीकारी। एक साल में छात्रा द्वारा स्वामी चिन्मयानंद से दो सौ और अपने कथित सहयोगी पुरूष मित्र को 42 सौ टेलीफोन काल्स किए जाने की बात सामने आयी। इतना साफ है कि छात्रा अपने पुरूष मित्र संजय सिंह और चिन्मयानंद दोनों के बराबर संपर्क में रही। इसी बीच छात्रा के मित्र संजय सिंह ने सचिन और विक्रम के साथ स्वामी चिन्मयानंद को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। पांच करोड़ रूपए की रंगदारी की मांग की। रूपए न देने पर अश्लील वीडियो वायरल कर देने को धमकाने लगे।

चिन्मयानंद की तरफ से इस मामले की एफआइआर दर्ज करा दी गयी। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर चार दिनों तक गहन पूछतांछ की। ब्लैकमेल करने वाले तीनों युवकों के अपराध स्वीकारने और साक्ष्य के आधार पर इनको भी जेल भेज दिया गया। शुरू में साजिश और छवि खराब करने की बात करने वाले चिन्मयानंद ने 20 सितम्बर को अदालत से साफ शब्दों में कहा ‘मैं शर्मिंदा हूँ’। इसके बाद अदालत ने स्वामी को जेल भेजने का आदेश दे दिया। एसआइटी प्रमुख डीआइजी नवीन अरोड़ा ने मीडिया से कहा कि पीड़िता ने जो वीडियो और क्लिप्स सौंपे थे उसे चिन्मयानंद को भी दिखाया गया। एसआइटी प्रमुख अरोड़ा के मुताबिक, चिन्मयानंद ने स्वीकारा कि वीडियो में दिखने वाले शख्स वही हैं। गोंडा जिले के परसपुर निवासी कृष्णपाल सिंह इंटर की पढ़ाई के बाद घर छोड़ा। सन् 1971 ऋषिकेश के परमार्थ आश्रम पहुंचे। संन्यासी से स्वामी बनने के बाद यहीं इनका नाम चिन्मयानंद रखा गया। स्वामी निश्चलानंद के अधिष्ठाता पद छोड़ने के बाद चिन्मयानंद शाहजहांपुर आ गए। मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता बन गए। तीन दशक में स्वामी चिन्मयानंद ने कामयाबी और प्रसिद्धि का लंबा सफर तय किया। खुफिया कैमरे की तेज नजर की वीडियो, न्यायालय का सीधे दखल और एसआइटी की जांच ने एक स्वामी और माननीय का असली चेहरा उजागर कर एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कानून के हाथ बड़े लंबे होते हैं। यह किसी का भी रूतबा, चेहरा और गिरेबान नहीं पहचानता।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार, और सबलोग के यूपी ब्यूरोचीफ हैं|

सम्पर्क –  +918840338705, shivas_pandey@rediffmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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