छत्तीसगढ़

सड़कों पर आवारा पशु जीवन शैली को चिढ़ा रही 

 

  • लक्ष्मी नारायण लहरे “साहिल”

 

गांव से लेकर छोटे – छोटे कस्बे और बड़े बड़े शहर की सड़कों पर वर्तमान में आवारा पशु घूम रहे हैं जो कहीं न कहीं हमारी जीवन शैली को चिढ़ा रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार नरवा-गरवा, भुरवा-बारी को महत्त्व देते हुए उस पर अपनी काम कर रही है जो प्रसंसनीय है। गांव गांव में गोठान का निर्माण हो रहा है जिससे कुछ हद तक आवारा पशुओं को गोठान में रखा जा सकता है।

आखिर पशु सड़कों पर आवारा क्यों हुए इसका जिम्मेदार मालिक है चाहे वह किसान हो या बड़े घराना के लोग जो पशु से मिलने वाले लाभ तो ले, ले रहे हैं और फिर सड़क पर छोड़ दे रहे हैं।गाय के विषय मे बचपन से पढ़ते आ रहे हैं गाय हमारी माता है। हिन्दू धर्म में गौमाता का दर्जा मिला है पर आज इसकी स्थिति देखिए? लोग एक गाय को पेट भर भोजन नहीं करा पा रहे हैं सड़कों पर जो आवारा पशु घूम रहे हैं इससे दुर्घटना बेहताशा बढ़ी है जो इंसान और जानवर दोनों के लिए हानिकारक साबित हो रही है जिससे पर्यावरण बिगड़ रहा है। गांव हो या शहर यादव समाज गौवंश सेवक के नाम से जाने जाते हैं ये समाज किसान के पशुओं को गांव गांव में चरवाहे का काम करते थे जो वर्तमान में आज लगभग मरणासन हो चुकी है अब बैल, भैंस गाय को चराने का काम बंद कर दिए हैं ये सब बातें आज के परिवेश में पशुओं को आवारा घुमने के लिए मजबूर कर दिए हैं।आवारा पशुओं पर लगाम लगाना जरूरी है इससे किसान को तो परेशानी है ही आम लोगों को भी परेशानी है। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्त्वकांक्षी योजना जो गांवों में गोठान निर्माण किया जा रहा है यह भविष्य में एक अच्छी लाभकारी योजना हो सकती है।  हर पशु मालिक का फर्ज होता है कि वो अपने बैल, भैंस गाय को जिम्मेदारी से पालन करे उनकी देख भाल करें। समय रहते हमें इस विषय पर चेतना होगा नहीं तो आवारा पशुओं से जो हानि होगी वह बड़ी समस्या बनकर खड़ी होगी|

 

युवा साहित्यकार पत्रकार

सह सम्पादक छत्तीसगढ़ महिमा हिन्दी मासिक पत्रिका रायपुर

सम्पर्क- +919752319395, shahil.goldy@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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