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चार साल में भुखमरी से 56 की मौत

 

  • नवल किशोर कुमार

 

यूनिसेफ ने आंकड़ा जारी किया है। इसके मुताबिक भारत में हर साल 40 फीसदी अनाज बेकार हो जाते हैं। बेकार मतलब सड़ जाते हैं। पका हुआ भोजन व्यर्थ करने में भी भारत विश्व के अग्रणी देश में है। गनीमत है कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को यह आंकड़ा पहले नहीं मिला, नहीं तो यह संभव था कि एक दिन में बॉक्स ऑफिस पर होने वाले 120 करोड़ के संग्रह का आंकड़ा प्रस्तुत कर भारत की आर्थिक मजबूती का सबूत देने के साथ ही वे यह भी कहते – देखिए, भारत में कहां गरीबी है। महंगाई भी नहीं है। भुखमरी तो बिलकुल नहीं है। यूनिसेफ भी कह रहा है कि हम भारत के लोग हर साल 40 फीसदी अनाज बर्बाद कर देते हैं।

लेकिन रविशंकर प्रसाद ने पहले ही अपने बचकाने बयान पर सार्वजनिक तौर पर स्पष्टीकरण दिया है। देश के हालात ने उनकी बोलती बंद कर दी है। यूनिसेफ के आंकड़े भयावह हैं। उसके मुताबिक भारत में हर तीसरा आदमी या तो भुखमरी का शिकार है या फिर भुखमरी के कगार पर है। पांच वर्ष तक की उम्र के करीब 38 फीसदी बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स खतरनाक है। करीब 52 फीसदी महिलाएं रक्त की कमी यानी अनीमिया की शिकार हैं।

कुछ और बातों पर गौर करते हैं। जिस देश ने मंगल पर महल बनाने के लिए चंद्रयान-2 अभियान चलाया है, उसी देश में वर्ष 2015 में 7, 2016 में 7, 2017 में 14 और पिछले वर्ष यानी 2018 में 28 लोगों की मौत भूख के कारण हो गयी। इस प्रकार पिछले चार वर्षों में कम-से-कम 56 भुखमरी से मौतें हुई हैं. इनमें से 42 मौतें 2017 व 2018 में हुई हैं। यह भारत के गरीबों के जीवन में अनिश्चितता की स्थिति को दर्शाता है। इसका समाज शास्त्र भी है। भुखमरी के शिकार हुए अधिकांश व्यक्ति वंचित समुदायों आदिवासी, दलित व मुसलमान  के हैं।

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इनमें से झारखंड की 11-वर्षीय संतोषी कुमारी की मृत्यु खास दुखद थी। संतोषी 28 सितम्बर 2017 को अपनी माँ को भात-भात कहते-कहते मर गयी। एक और उदाहरण देखिए उत्तर प्रदेश का। झारखंड की तरह यहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। 14 नवंबर 2017 को यूपी के बरेली में सकीना नामक एक महिला (उम्र करीब 50 साल) की मौत हो गयी। वह लंबे समय तक भुखमरी से जुझ रही थी।

एक और घटना के बारे में जानें। आपको सोचकर हैरानी होगी कि हम उस देश के वासी हैं जहां के प्रधानमंत्री का लिबास नौलखा हार के बराबर है। 5 जुलाई 2018 को यह लोमहर्षक घटना उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में ही घटित हुई। राजवती (60 वर्ष) रानी (25 वर्ष) ने खुदकुशी कर ली थी। वजह यह रही कि सरकार ने उनके राशन कार्ड को रद्द कर दिया था क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं था। यह तब जबकि सुप्रीम कोर्ट कई बार न्यायादेश जारी कर चुका है कि सरकारी योजनाओं के लिए आधार को बाधक न बनाया जाय।

बहरहाल, आंकड़े और घटनाएं आपके सामने हैं। भारत के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आने वाले समय में इस हालात में सुधार हो, इसकी कोई कोशिश सरकार के स्तर पर होती दिख नहीं रही है। हां, अखबारों में सरकार का चेहरा जरूर चमक रहा है।

लेखक फॉरवर्ड प्रेस, दिल्ली के सम्पादक (हिन्दी) हैं|

सम्पर्क-  nawal4socialjustice@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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