बिहार

सम्पर्क पथ न बनने की त्रासदी झेलते दो राज्यों के लोग

 

  • कुमार कृष्णन

 

साढ़़े तीन दशक से ज्यादा हो गए भागलपुर के सीमावर्ती क्षेत्र सन्हौला और झारखण्ड के गोड्डा के बीच सम्पर्क का सुगम रास्ता वहाल नहीं हो पाया है। चार दशक से इस क्षेत्र के लोग लगातार इसकी मांग करते रहे हैं। इस क्षेत्र की जनआकांक्षाओं को ध्यान में रखकर लोक सभा में इस मामले को जब उठाया तो पुल तो बना, लेकिन सम्पर्क

पथ के अभाव में बना हुआ पुल उपयोगिता वि​हीन साबित हो रहा है। बिहार की ओर से सम्पर्क पथ नहीं जोड़े जाने के कारण अनुपयोगी साबित हो रहा है। गोड्डा जिले के महागामा अनुमंडल क्षेत्र को बिहार के भागलपुर क्षेत्र से जोडऩे का सपना जो लोगों ने संजोया था, आज भी अधूरा है।

 

2002 में तात्कालीन सांसद सुबोध राय ने मामले को लोक सभा में कहा था—” सभापति महोदय, बिहार में भागलपुर के जिलान्तर्गत सन्हौला प्रखण्ड और झारखण्ड राज्य के हनवारा के बीच गेरुआ नदी पर कोई पुल नहीं होने के कारण कृषि उत्पादन के मामले में अत्यधिक उपजाऊ क्षेत्र तथा व्यस्त व्यापारिक केन्द्र होने के बावजूद यह इलाका पिछड़ेपन का शिकार है। आजादी के 55 वर्षों में इस क्षेत्र के विकास हेतु कृषि, व्यापार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की दिशा में कोई प्रभावशाली कदम नहीं उठाया गया है। फलस्वरूप गरीबी, अभाव, अशिक्षा और बेरोजगारी के कारण इलाके के युवाओं की विशाल संख्या को दिशाविहीन जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।अतएव भारत सरकार से मांग है कि झारखण्ड एवं बिहार के उपरोक्त सीमावर्ती क्षेत्र के चौतरफा विकास हेतु हनवारा (झारखण्ड) एवं सन्हौला (बिहार) को जोड़ने हेतु गेरुआ नदी पर शीघ्र पुल निर्माण किया जाए ताकि झारखण्ड एवं बिहार राज्य के बीच आवागमन एवं व्यापार का विकास संभव हो।

काफी जद्दोजेहद के बाद पुल का शिलान्यास 2009 – 2010 में  भागलपुर के तत्कालीन सांसद शाहनबाज हुसैन ने किया। बिहार के तत्कालीन पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने इस पुल को स्वीकृति दिलायी ।करीब 20.50 करोड़ की लागत से 2015 में इस पुल का निर्माण हुआ। बिहार और झारखण्ड को जोड़ने वाली सड़क सन्हौला-हनवारा पथ पर गेरुआ नदी में बना हनवारा पुल अपने निर्माण के चार वर्षों बाद भी आवागमन के लिए तैयार नहीं हो सका है। इसका मुख्य कारण है बिहार राज्य की तरफ से पुल तक पहुँचने के लिए सम्पर्क सड़क  का नहीं बन पाना। जबकि झारखण्ड की तरफ से पुल पर जाने का सड़क बनकर तैयार है। इस पुल की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक चुनाव में बिहार और झारखण्ड के नेताओं के लिए यह चुनावी मुद्दा बनकर उभरता है।एकीकृत बिहार के पूर्व सांसद और मुख्यमंत्री रहे भागवत झा आजाद (जिनका गृह जिला आज के झारखण्ड क्षेत्र में आता है) को हराने वाले पूर्व सांसद स्व.चुनचुन यादव के समय से ही इस पुल के निर्माण की मांग उठती रही है। सिर्फ बिहार के हिस्से का एप्रोच पथ नहीं बन पाने के कारण इस पुल पर यातायात शुरू नहीं हो पाया है। फिलहाल, नदी से होकर बने डायवर्सन की तरफ से ही गाडियां आती-जाती है। बिहार की तरफ से एप्रोच पथ नहीं बनने मे मुख्य समस्या जमीन अधिग्रहण की है। बिहार की तरफ से पुल तक जाने के लिए लोगों की निजी जमीन आड़े आ रही है। इस जमीन का बिहार सरकार की तरफ से अधिग्रहण नहीं हो सका है। इस कारण लोगों और वाहनों के आने-जाने का मुख्य साधन नदी से होकर बना डायवर्सन है।इस डायवर्सन पर गुजरने वाले वाहनों से कमाई के मामले का रहस्योद्घाटन हुआ है। इस डायवर्सन से होकर गुजरने वाली गाड़ी से से बिहार-झारखण्ड के कुछ स्थानीय दबंगों द्वारा वाहन चालकों से अवैध रूपये की उगाही की जाती है। इस सम्बन्ध में पास के पोठिया गाँव के ग्रामीणों ने सन्हौला थाना में मामला दर्ज कराया है। इन लोगों ने आवेदन के साथ प्रमाण स्वरूप गाडियों से अवैध वसूली करने की सीडी भी पुलिस को सोंपी है। ग्रामीणों ने एसडीओ को इस सम्बन्ध में आवेदन दिया था। उनके निर्देश पर ही सन्हौला थाना में मामला दर्ज कराया गया है।

 

इस क्षेत्र के निवासी जयशंकर मिश्रा जो मुंबई में रहते हैं, उनका कहना है कि — इस मार्ग के चालू होने से बिहार-झारखण्ड के सात प्रखंडों के लोग लाभान्वित होंगे। इन प्रखंडों के लोगों को अभी बरसात के महीने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। वे गेरुआ नदी को नाव के सहारे पार कर अपने घरों को जाते हैं। वर्तमान में एकचारी होकर आना पड़ता है। इससे भागलपुर से गोड्डा की दूरी करीब 70 किलोमीटर पड़ती है। पुल बनने के बाद लगभग 25 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। इससे पैसा व समय दोनों की बर्बादी से लोग बच सकेंगे। सेतु निर्माण के बाद बसंतराय होकर गोड्डा के लोग आसानी से भागलपुर पहुंच सकेंगे।“ इस क्षेत्र में जब भी आते हैं तो उन्हें यह पीड़ा सालती है। एक अन्य व्यक्ति का कहना है कि इस मार्ग के चालू होने से भागलपुर के सन्हौला, गोराडीह, जगदीशपुर, बांका के धौरेया, झारखण्ड के गोड्डा जिले के पथरगामा, महागामा, बसंतराय के लोगों को आवागमन से सुविधा होगी, लेकिन सरकार मामले को लटकाकर रखे हुई है। महागामा के भाजपा विधायक अशोक कुमार भगत के गांव नरैनी होकर हनवारा के रास्ते इस पुल से होकर भागलपुर जाने में एक घंटे का कम समय लगता। अभी लोग एकचारी गांव से होकर जाते हैं। इससे भागलपुर पहुंचने में अधिक समय लगता है। करीब दो दशक पूर्व राज्य का विभाजन तो हुआ, लेकिन गोड्डा के लोगों की आवाजाही आज भी भागलपुर अधिक होती है। गोड्डा में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हर दिन भागलपुर ही रेफर किया जाता है। अभी जिस रूट से लोग भागलपुर जाते हैं, उस सड़क पर आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। यह जाम कभी कभी तो जाम दो दिनों तक भी नहीं हट पाता है। आज भी जाम से बचने के लिए महागामा अनुमंडल क्षेत्र के लोग ज्यादातर इसी मार्ग से होकर भागलपुर जाते हैं। महगामा के विधायक अशोक भगत का कहना है कि-“गेरुआ नदी पर बना यह पुल 2015-16 में यह बनकर तैयार हो गया। लेकिन भागलपुर जिलांतर्गत उक्त पुल के एप्रोच रोड को लेकर जमीन विवाद के कारण निर्माण एजेंसी ने काम पूरा नहीं कर पाई है। पुल निर्माण कार्य बिहार सरकार का है। लिहाजा इस बार बिहार सरकार को ही निर्णय लेना है।“ सामान्य मौसम में लोग पुल के नीचे बनी कच्ची सड़क से होकर अपने वाहनों को निकाल लेते हैं, मगर बरसात के दिनों में नदी में पानी आ जाने से नदी पार करना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि परेशानी तो उस वक्त होती है जब लोग ईलाज के लिए जल्द पहुंचने की चाहत में इस मार्ग से होकर जाते हैं और नदी में आकर फंस जाते हैं। बरसात के दिनों में इमरजेंसी में एम्बुलेंस को भी घंटों इंतजार करना पड़ता हैं। इस पुल के सम्पर्क पथ को लेकर राजनीति होती आयी है और श्रेय लेने की होड़ है। भाजपा के सासंद निशिकांत दूबे बताते हैं कि जब लोग श्रेय लेने लगते हैं तो मामला अटक जाता है। श्रेय लेने की रेस में वे चुप हैं। वैसे इन तमाम मामलों पर राज्य के पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा कहते हैं —’ कि इस पुल पर जाने के लिए सम्पर्क सड़क बनना है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना है। वे भागलपुर भी आए थे और हनवारा पुल के पास भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में भागलपुर के जिला पदाधिकारी से बातचीत की। उन्हें निर्देश दिया है कि जमीन मालिकों को मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहण कर सम्पर्क सड़क बनाने की दिशा में अविलंब कार्रवाई करें। उन्हें उम्मीद है कि भूमि अधिग्रहण की समस्या जल्द निबट जायेगी। एप्रोच रोड बनाने के बाद मार्च तक आवागमन शुरू हो जायेगा।’

लेखक स्वतन्त्र पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं|

सम्पर्क- +919304706646, kkrishnanang@gmail.com

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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