दिल्ली

भारत विभाजन अंग्रेजों द्वारा फैलाये झूठ का परिणाम

 

  • शशिधर शुक्ला

 

भारत का विभाजन अंग्रेजों द्वारा फैलाये झूठ को सत्य मानने और जल्द से जल्द सत्ता पाने की हवस का परिणाम है। यह पूरी तरह से अप्राकृतिक और असंवैधानिक है इसलिए इसका समाप्त होना तय है।’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सेवा प्रमुख मिथलेश कुमार ने जम्मू कश्मीर पीपल्स फोरम द्वारा विकासपुरी के अग्रसेन भवन में आयोजित अखण्ड भारत दिवस समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय इतिहास के अनेक बिन्दुओं पर प्रकाश डालते हुए इमरान खान द्वारा पाकिस्तानी संसद में ‘एक कौम के सफाये’ की चर्चा पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए पूछा कि पाकिस्तान में हिन्दूओं की जनसंख्या 20 प्रतिशत से 1 प्रतिशत पहुंचना क्या है? बंगलादेश में 23 से 5 प्रतिशत होना क्या है? 1990 में हिन्दूओं को कश्मीर छोड़ने के लिए बाध्य करना क्या है? भारत में सभी मतालंबी सुरक्षित है। तभी तो स्वतंत्रता के बाद भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या प्रतिशत मे हिन्दूओं के मुकाबले अधिक वृद्धि हुई है।’


इससे पूर्व जम्मू कश्मीर पीपल्स फोरम के प्रदेश संयोजक महेन्द्र मेहता ने अखण्ड भारत दिवस समारोह की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए पाक अधिकृत कश्मीर को प्राप्त करने के संसद के सर्वसम्मत प्रस्ताव की चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भास्कराचार्य कालेज के प्रधानाचार्य डॉ’ बलराम पाणी ने जम्मू कश्मीर से विभाजक अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने को वहां लोगों के हित में बताया। उन्होंने विज्ञान के उदाहरण के माध्यम से अखण्ड भारत को हर भारतीय के गुणसूत्रों में विद्यमान बताया। दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री श्री विनय आर्य ने अखण्ड भारत के स्वप्न को पुनः साकार करने के लिए समाज के उपेक्षित वर्गाे को गले लगाने पर बल देते हुए कहा कि हमारी लापरवाही और उपेक्षा के कारण ही हमारे अपने समाज के लोगों को हमसे अलग करने और कालान्तर में हमारे ही विरूद्ध खड़े करने के षडयंत्र सफल होते रहे है।


कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए मनोज खण्डेलवाल ने कहा कि किसी भी देश के लिए उसका स्वतंत्रता दिवस प्रसन्नता का अवसर होता है। लेकिन भारत को मिली स्वतंत्रता प्रसन्नता के साथ उन लोगों को स्मरण करने का अवसर भी है जो हमसे बिछड़ गये। आंसूओं और लाखों स्वजनों के खून से डूबी इस आजादी ने प्रत्येक भारतीय को विचलित भी किया। इसीलिए हम अखण्ड भारत दिवस मनाकर सभी हुतात्माओं को स्मरण करते हुए पुनः अखण्ड होने का संकल्प लेते है। कार्यक्रम का शुभारम्भ वंदेमातरम् तथा समापन राष्ट्रीय गान से हुआ इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक संगठनों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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