नाटक

भागलपुर की संस्था ‘समवेत’ द्वारा छः दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आयोजन – नेहा

 

  • नेहा 

 

भागलपुर कला समृद्ध शहर है। यहाँ विविध कलायें हमेशा से फलती-फूलती रही हैं। खासकर थिएटर से भागलपुर का पुराना रिश्ता रहा है। इसी रिश्ते की एक कड़ी है, बीते दिनों सामाजिक, सांस्कृतिक सरोकार रखने वाली, भागलपुर की संस्था ‘समवेत’ द्वारा छः दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आयोजन।

इस कार्यशाला के प्रशिक्षक थे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्ष के छात्र आलोक रंजन। उन्होंने प्रतिभागियों को अभ्यास के द्वारा शारीरिक रूप से तैयार करने की कोशिश की। उन्होंने बताया की थिएटर के लिए शरीर एक टूल है। उसे लचीला बनाए बिना उसका सही इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके साथ-साथ वॉयस कैसे शब्द बनता है, इस पर भी उन्होंने वर्णमाला के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया। सही उच्चारण की बदौलत हम अपनी बात दर्शकों तक पहुँचा सकते हैं। औब्जेर्व्हेशन थिएटर का ज़रूरी पहलू है, इस बात को भी बड़ी कुशलता से आलोक रंजन ने प्रतिभागियों को बताया। कार्यशाला के अन्तिम चरण में कार्यशाला में तैयार इवेंट के साथ एक नाटक की भी प्रस्तुति हुई। इस नाटक की स्क्रिप्ट कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक आलोक रंजन ने प्रतिभागियों के साथ मिलकर इम्प्रोवाइज करके बनाई थी। स्क्रिप्ट की विषय-वस्तु भूख, बेरोज़गारी, गरीबी, किसानों की आत्महत्या, महिला उत्पीड़न और पलायन की समस्या थी। समाज में व्याप्त इतने अंधेरे को विषय बनाते इस नाटक को एक उपयुक्‍त शीर्षक चाहिए था और ‘द डार्क शैडो’ से बेहतर क्या हो सकता था। कार्यशाला में प्रतिभगियों के रूप में खुशी कुमारी, मकसूदन, मिथिलेश, ऋषभ, बिपिन, राजदेव, सुमित, सलमान, आलोक, सागर मोहन, घनश्याम, खुशबू, करन, पूनम, मोनु, मनीषा, स्वीटी, निधि, अविनाश तिवारी, मोहम्मद वकार नवाज़, गोविन्द, सुमित और जुली आदि उपस्थित थे। इस कार्यशाला को सफल बनाने में व्यवस्थापक की अहम भूमिका रही।

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान व्यवस्थापक श्री सुनील कुमार मण्डल, कुमार चैतन्य प्रकाश, श्री विक्रम आदि मौज़ूद थे। कार्यक्रम का उद्घाटन डीएस डब्ल्यू, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, डॉक्टर योगेन्द्र, पूर्व मेयर डॉक्टर वीणा यादव, वरिष्ठ रंगकर्मी डॉक्टर चन्द्रेश, श्री सुनील जैन, वरिष्ठ गाँधीवादी मनोज मीता, वरिष्ठ पत्रकार किशन कालजयी तथा ‘समवेत’ के निर्देशक विक्रम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। ‘समवेत’ ने एक कारवाँ चलाया है जिसके तहत लगातार सांस्कृतिक अभ्यास चल रहा है, प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। बाल-अधिकार को समाज में स्थापित करने के लिए बहुत सारी प्रक्रिया चलाई जा रही है। समवेत की सकारात्मक सक्रियता ने भागलपुर, बेगूसराय और बिहार के कई ज़िले के लोगों में जागरूकता और एक नया जोश पैदा किया है।

सम्पर्क- +919740622008,

 

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

One thought on “भागलपुर की संस्था ‘समवेत’ द्वारा छः दिवसीय नाट्य कार्यशाला का आयोजन – नेहा

  1. Mansoor Ahmad Reply

    The title “Dark Shadow” is very meaningful. It throws impact to the listener. And to present before the society the reality of the life through Natak will certainly impress the public to think over the issues and will bring change in life who are the worst sufferer. Go ahead in your programme. May God bless you strength and dedication.

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