मैं कहता आँखन देखी

पटना नहीं, डूब रही नीतीश की सियासत

  • नवल किशोर कुमार

आज का सवाल है कि वे कौन हैं जो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ट्वीटर पर गालियां दे रहे हैं? यह एक सैंपल सर्वे है ट्वीटर के जरिए। लोग गालियां क्यों दे रहे हैं, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में मुख्य कारण पटना में आयी बाढ़ है। परंतु, जैसा कि पहले कहा कि विरोध करना, आक्रोशित होना दूसरी बात है, गालियां देना दूसरी बात। इससे पहले कि हम इस विषय पर चर्चा करें। एक नजर पटना और बिहार के हालात पर डालते हैं।लगातार भारी बारिश की वजह से पूरे बिहार में त्राहिमाम की सूचना मिल रही है। अबतक 24 लोगों के मरने की खबर भी आयी है। हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टि सरकारी तंत्र द्वारा नहीं की गयी है। त्राहिमाम से जुड़े वीडियोज सबसे अधिक राजधानी पटना से आ रही है, जहां राज्य सरकार की नाव चल रही है और केंद्र सरकार की भी। एक वीडियो जेसीबी का भी सामने आया। पटना नगर निगम ने लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जेसीबी का उपयोग किया। पटना से एक पत्रकार साथी की जीवनसंगिनी ने एक वीडियो में बताया कि जिस अपार्टमेंट में वह रहती हैं, उसके बेसमेंट में पानी भर गया है। पानी चलाने के लिए मोटर का इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता है।

सबसे अधिक समस्या उन्हें हो रही है जिनके आशियाने छोटे हैं। छोटे यानी एक तल वाले मकान या फिर स्लम में रहने वाले लोग। एक साथी प्रभाकर कुमार के फेसबुक से जानकारी मिली कि स्लम बस्तियों झोपड़ियां जलमग्न हो चुकी हैं। किसी तरह लोग गुजर-बसर कर रहे हैं। सरकार की तरफ से उनके लिए कोई मेगा राहत कैंप नहीं चलाया गया है जो कि नीतीश कुमार का शगल रहा है। 2008 में कुसहा त्रासदी के समय नीतीश कुमार मेगा राहत कैंप का नुस्खा आजमाया था।

 

पटना से कुछ साथी बता रहे हैं कि लोग जहां के तहां फंसे पड़े हैं। खाने-पीने की समस्या तो है ही, शौच त्यागने में भी परेशानी है। घरों में गंदगी पहुंच रही है। कहने का मतलब यह कि पूरे पटना में त्राहिमाम की स्थिति है। अलबत्ता यह आधा पक्ष है। इसका दूसरा आधा पक्ष यह है कि बहुत सारे इलाके जो गांव-जवार के इलाके कहे जाते हैं, वहां बाढ़ की समस्या नहीं है। हालांकि लगातार बारिश का असर वहां भी जनजीवन पर पड़ ही रहा है। लेकिन वे इलाके पटना में होने के बावजूद पटना के इलाके नहीं कहे जाते। वे सब पटना के उपेक्षित इलाके हैं।

खैर, अब इस लेख के मूल विषय पर लौटते हैं। भारत की मुख्य न्यूज एजेंसी एएनआई ने करीब 17 घंटे पहले एक ट्वीट जारी किया। यह नीतीश कुमार का बयान है – Bihar Chief Minister Nitish Kumar on flood situation in the State : Such a situation is not in any one’s hand, it’s a natural thing. Arrangements are being done to provide drinking wather to all. Also arrangements are being made for community kitchen for the flood affected people.

यानी नीतीश कुमार के मुताबिक, ऐसी स्थितियां किसी के वश में नहीं होतीं। यह प्राकृतिक घटना (आपदा कहना शायद भूल गये) है। सभी लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही सामुदायिक रसोईघर की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि बाढ़ पीड़ित लोगों को खाना मिल सके।

एएनआई के इस ट्वीट पर खबर लिखे जाने तक 115 लोगों ने लाइक बटन दबया है। 17 लोगों ने ट्वीट को रि-ट्वीट किया है जबकि 23 लोगों ने कमेंट किया है। किसी भी स्थिति के मूल्यांकन के लिए ये आंकड़े बहुत कम हैं। किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है। लेकिन ये संकेत जरूर देते हैं।

मसलन, एक यूजर जिनका नाम ट्वीटर पर काफिल शेख दिख रहा है, उनकी टिप्पणी है कि अरेंजमेंट किया होता तो पानी घर, अस्पताल में नहीं पहुंचता, नदी में होता। कुछ भी बक?? मत ??? चाचा। इस लेख की गंभीरता बनी रहे और इसलिए अपशब्दों को सीमित कर रहा हूं।

अमर ज्योति नामक एक यूजर ने लिखा है – लोल। इंटरनेट ने कई सारे शब्द इजाद किए गए हैं। इस शब्द का मतलब भी बेवकूफ होता है सामान्य तौर पर। लेकिन कई बार इसका दूसरा मतलब भी होता है – दूसरों को बेवकूफ बनाने वाला।

अपने नाम के साथ तिरंगा झंडा लगाए नंदन नामक एक यूजर ने अपने कमेंट में कहा है कि मुख्यमंत्री जी तैयारी की बात त मते कीजिए। बिहार और खास तौर पर पटना के लोगों को पता है कि हर साल बरसात के मौसम में क्या हाल होता है और प्रशासन इसके लिए कितना सजग रहता है।बरसात के मौसम में पटना नरक से कम नहीं होता। खास तौर पर बाजार समित, राजेंद्र नगर ओर कंकड़बाग का इलाका।

तिरंगा मार्का दडिसेंट नामक यूजर ने नीतीश कुमार को सलाह दी है कि भाई या तो ड्रेनेज सिस्टम ठीक कर नहीं तो आगे बढ़। अमन मिश्रा नामक एक यूजर ने नीतीश कुमार की मां-बहन को गाली देते हुए कहा है कि बिहार में कोई विकल्प नहीं है, इसलिए ???? कुछ भी बोलता है, लेकिन भाईयों इस बार बता देना इसको वोट मत देना।

इसी तरह की गंदी भाषा का उपयोग अधिकांश ने किया है। ट्वीटर पर नाम के आधार पर यह पहचान करना मुश्किल है कौन किस जाति-समुदाय का है। खास तौर पर अधिकांश दलित-पिछड़े अपने सरनेम का इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन उंची जातियों के लोगों के सरनेम हैं और उसके हिसाब से देखें तो अधिकांश गालियां देने वाले इसी जाति वर्ग के हैं।

दरअसल, ट्वीटर पर नीतीश कुमार को जो गालियां दे रहे हैं, उनमें से अधिकांश भाजपा के समर्थक भी हैं। यही दिलचस्प है। ये सभी जिस तरीके से कमेंट कर रहे हैं, यह महज एक संकेत है कि भाजपा ने अब नीतीश कुमार से गठबंधन तोड़ने का फैसला कर लिया है। शीर्ष पर हो चुके इस अघोषित फैसले की सूचना जमीनी स्तर पर उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मिल चुकी है।

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लोक चेतना का राष्ट्रीय मासिक सम्पादक- किशन कालजयी

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